Skip to main content

दशनाम गोस्वामी समाज ने श्रीमहंत नरेन्द्र गिरी के आकस्मिक निधन पर जताया शोक,निष्पक्ष जांच की मांग

 हरिद्वार। विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज ने श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि के निधन पर शोक व्यक्त कर सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत नरेन्द्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर विश्वगुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद गिरि ने शोक जताते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करते हुए कहा कि श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच सीबीआई से कराई जाए। उन्होंने कहा कि देश में दशनाम गोस्वामी समाज के संतों के साथ समय≤ पर घटनाएं घटती रहती हैं जो सनातन धर्म के लिए ठीक नहीं है। नरेन्द्र गिरि की मौत के मामले में जो भी दोषी लोग हैं उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए जिससे अन्य किसी संत के साथ ऐसी घटना घटित ना हो। प्रदेश महामंत्री विशाल गोस्वामी ने कहा कि श्रीमहंत नरेन्द्र गिरि महाराज दशनाम गोस्वामी समाज के आन-बान-शान थे। उन्होंने जीवन भारतीय संस्कृति देश समाज के लिए कार्य किए उनकी मौत की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल गिरि व शत्रुघ्न गिरि ने कहा कि सन्यासी संत महंत हमारे धर्म संरक्षक और संवर्धन करता है। संत समाज वह गोस्वामी समाज एक दूसरे के पूरक हैं हमारे संतों के साथ ऐसी घटनाएं होने से धर्म व संत समाज की हानि है। मनोज गिरि, बादल गोस्वामी, संदीप गोस्वामी, राजीव गिरि, चांद गिरि, महिला प्रदेश अध्यक्ष बिन्दु गिरि, धीरज गिरि, संगीता गिरि, मिथलेश गिरि, दीपक गिरि, अमित गिरि, गौरव गिरि, शिवम गिरि, अनिकेत गिरि, बलराम गिरि कड़क, महंत दुर्गेश गिरि, महंत बिन्दु, कौशल गिरि, कोमल गिरि आदि ने श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक