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पितरों की शांति के लिए आयोजित श्रीमद् भागवतकथा शुभारंभ पर कलश यात्रा निकाली

 


हरिद्वार। ज्वालापुर स्थित पंजाबी धर्मशाला में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। पितरों की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा की शुरूआत शुक्रवार को भागवत पुराण की शोभायात्रा से की गयी। शोभायात्रा में राष्ट्रीय जनलोक पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक शेरसिंह राणा ने फूलमाला पहनाकर राजस्थान मेवाड़ से पधारे कथा व्यास रोहित गोपाल जी भैया का स्वागत किया। मौहल्ला चैहानान से शुरू हुई शोभायात्रा मेहतान, कटहरा बाजार होते हुए पंजाबी धर्मशाला पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश लिए व मंगलगीत गाते हुए चल रही थी। नगर वासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। प्रत्येक दिन सांय 3 से 6 बजे तक होने वाले कथा के प्रथम दिन कथा व्यास रोहित गोपाल जी भैया ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का महात्मय बताते हुए नारद प्रसंग सुनाया। श्राद्ध पक्ष में पितरों की शांति के लिए विधि विधान का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पित्र रूष्ट हो जाते हैं। उनके घर में शांति और सौभाग्य नहीं रहता। इसलिए पूरी श्रद्धा और निष्ठा से नियमपूर्वक श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। कथा के प्रथम दिन गुघाल रोड़ निवासी राजपाल सिंह ने परिवार सहित यजमान का दायित्व निभाते हुए भागवत पुराण का पूजन कर कथा व्यास का अभिनन्दन किया। इस दौरान नरेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, रामनिवास सिंह, लोकेश कुमार, निरंजन प्रसाद, विपुल कुमार, दिनेश प्रसाद सिंह आदि सहित सैकड़ों श्रद्धालुजन मौजूद रहे। 


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

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आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

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