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भाकियू ने लखीमपुर में किसानों के साथ हुई घटना के विरोध में फूंका पुतला

 हरिद्वार। भारतीय किसान यूनियन ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक किसान आंदोलन चल रहा है। तब तक भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता किसानों के गांवों में दाखिल न हो। सोमवार को बहादराबाद टोल प्लाजा पर संयुक्त किसान मोर्चा के सैकड़ों किसानों ने एकत्रित होकर लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश में हुई घटना के विरोध में भाजपा केंद्र सरकार का पुतला दहन किया। उधर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने टोल प्लाजा बहादराबाद पहुंचकर किसानों को अपना समर्थन दिया है। किसान यूनियन ने राष्ट्रपति के नाम बहादराबाद थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान बहादराबाद, दिनारपुर, डांडी, अलीपुर, इब्राहीमपुर, अहमदपुर, समेत कई गांव के किसान प्रदर्शन में शामिल थे। भाकियू जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री ने कहा कि लखीमपुर खीरी में घटित घटना की किसान घोर निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सिकंदर की सरकार है। किसानों के वोट से राज करने वाले नेताओं ने जिस तरह सत्ता के नशे में चूर होकर किसानों के ऊपर मंत्री के बेटे ने गाड़ी चढ़ाई। और निर्दोष किसानों की हत्या कर दी। उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाना चाहिए। आकली दल के जिलाध्यक्ष सुब्बा सिंह ढिल्लो ने कहा कि किसान यूनियन द्वारा मृतक आश्रितों के लिए एक-एक करोड़ रुपये व सरकारी नौकरी की मांग की है। कहा कि मंत्री के बेटे के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। इस दौरान रूपेश सिंह, अंकुर चैधरी, रवि कुमार, संजय चैधरी, सुखराम पाल सिंह, निशान सिंह, चमन लाल शर्मा,भूरा चैधरी, आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महक सिंह, शिवकुमार, रोबिन गौतम आदि मौजूद थे।


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गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक