Skip to main content

शांतिकुंज ने किया कोरोना वॉरियर्स को सम्मानित,पितृ अमावस्या पर हजारों ने किया सामूहिक श्राद्ध तर्पण


 हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं शैलदीदी ने कोरोना काल में विशेष कार्य करने वाले श्मशान घाट खड़खड़ी एवं कनखल के पदाधिकारी एवं कर्मचारी सहित तीस लोगों को गायत्री मंत्र चादर, श्रीफल एवं ग्यारह-ग्यारह हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया। साथ ही कोरोना काल में पीड़ितों एवं जरूरतमंदों की सेवा में अहर्निश जुटे रहे शांतिकुज कार्यकर्त्ताओं को भी सम्मानित किया। सम्मान समारोह शांतिकुंज के सभागार में आयोजित हुआ। सम्मान समारोह के अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गायत्री परिवार के संस्थापक परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने पीड़ितों, जरूरतमंदों की सेवा तथा अच्छे कार्य करने वालों का सदैव सम्मान करते रहे। उनके बताये सूत्रों का पालन करते आज भी गायत्री परिवार जरूरतमंदों की सेवा करने में प्रसन्नता अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि श्मशान घाट खड़खड़ी एवं कनखल के ऐसे करीब तीस लोग, जिन्होंने कोरोना काल में जी तोड़ मेहनत करते हुए अपने दायित्व निभाया। हमें उनका सम्मान करते हुए हर्ष हो रहा है। श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि कोरोना से असमय कालकलवित हुए लोगों के अंतिम संस्कार के समय बिना किसी परवाह के कार्य किया है। ये सच्चे कोरोना वारियर्स हैं। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर कोरोना काल के बीच असमय कालकवलित हुए आत्माओं की शांति एवं सद्गति के लिए गायत्री परिवार प्रमुखद्वय डॉ. प्रणव पण्ड्या एवं शैलदीदी ने विशेष श्राद्ध संस्कार एवं जलांजलि अर्पित की। उल्लेखनीय है कि इन कोरोना वॉरियर्स का सम्मान समारोह की योजना देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने बनाई थी। शांतिकुंज व्यवस्थापक महेन्द्र शर्मा ने बताया कि शांतिकुंज में सर्वपितृ अमावस्या के मौके पर तीन अलग-अलग स्थानों में सामूहिक श्राद्ध संस्कार चैदह पारियों में सम्पन्न हुआ। जिसमें शांतिकुंज परिवार के अलावा विभिन्न राज्यों से आये हजारों श्रद्धालुओं ने अपने-अपने पितरों एवं कोरोनाकाल में दिवंगत हुए आत्माओं की शांति एवं सद्गति के लिए जलांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि शांतिकुंज में श्राद्ध संस्कार निःशुल्क सम्पन्न कराये गये। 


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक