Skip to main content

आयोग उपाध्यक्ष ने की अल्पसंख्यकों के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा

 संतोषजनक उत्तर नही देने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी का स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिये


हरिद्वार। उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब ने केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए चलायी जा रही विभिन्न योजनाओे की समीक्षा करने पहुचे। संबंधित विभागीय के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कई बिंदुओं के उत्तर संतोषजनक न होने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी का स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिये। मंगलवार को रोशनाबाद स्थित सभागार में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को अधिकारों के प्रति जागरूक किये जाने, समस्याओं के निराकरण हेतु ’’जन जानकारी अभियान’’ कार्यक्रम चलाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग आपसी तालमेल से अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए संचालिक योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को पहुंचाएं तथा योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस योजना में आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर है। अधिक से अधिक छात्रों को इसका लाभ मिलना चाहिए। कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा जो भी कार्य किए जा रहे हैं उसका विवरण 21 अक्तूबर तक उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से जनपद के स्कूलों की स्थिति और प्रधानमंत्री जन विकास योजना व सर्व शिक्षा में जनपद को कितना पैसा मिला, अल्पसंख्यकों के कितने बच्चों के छात्रवृत्ति के प्रस्ताव विभाग द्वारा भेजे गए आदि की जानकारी ली। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी ने उपाध्यक्ष को बताया कि टेक होम राशन के अन्तर्गत कुल दो लाख में से 78 हजार अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को लाभान्वित किया गया। उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना को लेकर महाप्रबंधक उद्योग से वर्ष 2017 से 2021 तक जिन-जिन योजनाओं में लाभार्थियों को लाभांवित किया उनका पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। महाप्रबन्धक उद्योग से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के बारे में जानकारी ली। इस पर महाप्रबन्धक उद्योग ने बताया कि इस योजना के तहत 114 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 37 अल्पसख्यंक वर्ग के लोगों को गत वर्ष लाभान्वित किया गया तथा इस वर्ष 12 लोगों को लाभान्वित किया गया। उपाध्यक्ष ने महाप्रबन्धक उद्योग को निर्देश दिये कि वर्ष 2017 से 2021 तक जिन-जिन योजनाओं में लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है, उसका पूरा विवरण उपलब्ध करायें। मजहर नईम नवाब ने लोनिवि के अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री जन कल्याण योजना के तहत संपर्क मार्ग का अगर कोई प्रस्ताव है, तो उसे तुरन्त भेजें तथा आयोग की ओर से जब कभी कोई जवाब मांगा जाता है, तो उसका उत्तर शीघ्र देना सुनिश्चित करें। वैक्सीनेशन की जानकारी मांगने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 92 प्रतिशत लोगों को पहली डोज और 25 से 30 प्रतिशत लोगों को दूसरी डोज लग चुकी है। समीक्षा बैठक में पेयजल निगम के अधिकारियों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत 394 गांवों की डी0पी0आर0 बन चुकी है तथा 125 के टेण्डर हो चुके हैं, जिनका कार्य इसी माह प्रारम्भ हो जायेगा। श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि श्रमिकों के 45413 कार्ड अभी तक बन चुके हैं तथा श्रमिक पेंशन हेतु 3486 का पंजीकरण हो चुका है। उपाध्यक्ष ने बैठक में पुलिस, डेयरी विकास, खादी ग्रामोद्योग,ग्रामीण अभियन्त्रण सेवा,पंचायती राज, मत्स्य, नगर निगम, एचआरडीए, विद्युत आदि विभागों से भी अल्पसंख्यक कल्याण हेतु चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी ली। बैठक में आयोग के सदस्य असगर अली एवं राव वरीश खां, आयोग सचिव जे0 एस0 रावत, मुख्य विकास अधिकारी डॉ0 सौरभ गहरवार,परियोजना निदेशक आर0सी0 तिवारी, सुश्री पल्लवी गुप्ता, महाप्रबन्धक उद्योग, डॉ0 योगेश भारद्वाज जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी, जिला विकास अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह चैहान,जिला कार्यक्रम अधिकारी देवसिंह सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक