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रामलीला रंगमंच से संपूर्ण जनमानस में सदविचारों का समावेश करती है-मदन कौशिक

 


हरिद्वार। श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला का शुभारंभ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं नगर विधायक मदन कौशिक ने फीता काटकर किया तथा श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री ने शुभता का प्रतीक नारियल तोड़कर श्रीरामलीला का मंचन सकुशल संपन्न होने की कामना की।  अतिथियों ने संयुक्त रूप से मंगल दीप प्रज्वलित कर समाज में बढ़ रहे अज्ञानता रूपी अंधकार को समाप्त करने की मां गंगा से प्रार्थना की। रंगमंच का शुभारंभ करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि श्रीरामलीला के दर्शन से मर्यादित आचरण की प्रेरणा मिलती है और श्री रामलीला कमेटी अपने रंगमंच से संपूर्ण जनमानस में सदविचारों का समावेश करती है। उन्होंने बड़ी रामलीला के आयोजकों को साधुवाद देते हुए कहा कि धार्मिक प्रेरणादायी दृश्यों से ही समाज में बढ़ रहे नैतिक पतन को रोका जा सकता है ।श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह शास्त्री ने कहा कि राम लीला का दर्शन ही मानव जीवन की समस्याओं के समाधान का माध्यम है और भगवान श्रीराम की शरण में आने वाले की समस्त समस्याओं का स्वतः ही समाधान हो जाता है। श्रीराम के चरित्र को संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणादायी बताते हुए उन्होंने कहा कि इस आयोजन से सभी दर्शकों को भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त होगा। श्री रामलीला कमेटी ने इंद्र दरबार, नारद मोह, कैलाश लीलां रावण अत्याचार तथा वेदवती संवाद से अपने 96वें वार्षिकोत्सव के शुभारंभ में दिखाया कि तपोवल की शक्ति से इच्छित वरदान प्राप्त किया जा सकता है लेकिन अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है। इंद्र दरबार से प्रारंभ हुई लीला में कामदेव भी नारद की तपस्या भंग नहीं कर पाए तो नारद को अभिमान हो गया, तब भगवान श्रीहरि ने विश्वमोहिनी के स्वयंवर मे नारद को बंदर का स्वरूप देकर उनका अहंकार तोड़ा। अपने अपमान से गुस्साए नारद ने भगवान विष्णु को भी त्रेतावतार के लिए अभिशाप दिया । ब्रह्मा का वरदान पाकर रावण का अहंकार बढा तो उसने कैलाश पर्वत पर चढ़ाई कर दी लेकिन शंकर जी ने उसे क्षमा दान देते हुए अपनी चंद्रहास तलवार देकर अपने भोले भगवान स्वरूप को सार्थक किया। रावण ने अहंकारवस ही ऋषि कन्या वेद वती को स्पर्श किया तो वेदवती ने भी रावण को अभिशाप दिया। श्री रामलीला कमेटी ने प्रथम दिवस के संपूर्ण दृश्यों के माध्यम से समाज को प्रेरणा दी कि व्यक्ति का कर्म या तपस्या कभी निष्फल नहीं होती ,लेकिन जब व्यक्ति को अहंकार हो जाता है तब वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाता और उसका पतन हो जाता है। इस दौरान अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा, उपाध्यक्ष सुनील भसीन, महामंत्री महाराज कृष्ण सेठ,मुख्य दिग्दर्शक भगवत शर्मा मुन्ना, कोषाध्यक्ष रविंद्र अग्रवाल, मंत्री डॉ संदीप कपूर, महिला स्वागताध्यक्ष अंजना चड्डा ,विनय सिंघल, महेश गौड़ ,सुनील वधावन ,मयंक मूर्ति भट्ट, विशाल गोस्वामी, दर्पण चड्ढा ,मनोज बेदी ,सुरेंद्र अरोड़ा, रमेश खन्ना, ऋषभ मल्होत्रा ,साहिल मोदी, कन्हैया खेवडिया तथा राहुल वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।


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