Skip to main content

लखीमपुर कांड के विरोध में कांग्रेसी विधायकों,नेताओं ने दी गिरफ्रतारियां

 


हरिद्वार। डाॅ0 मनोज कुमार-उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों को कथित तौर पर कुचलने वाली घटना तथा मौके पर जा रही कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के साथ अभद्र व्यवहार और गिरफ्तार करने के विरोध में बड़ी संख्या में कांग्रेसियों ने काली पट्टी बांधकर मौन व्रत रखकर विरोध जताने के बाद गिरफ्रतारियां दी। रोशनाबाद में एसएसपी कार्यालय के बाहर मौन व्रत पर बैठे कांग्रेस विधायक और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय कांग्रेसियों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस कप्तान डॉ. योगेंद्र सिंह रावत के समझाने के बाद भी विधायक धरने स्थल से नहीं उठे। कांग्रेस विधायक और कार्यकर्ता गिरफ्तारी देने की जिद पर अड़े रहे। लगभग एक घंटे बाद तहसीलदार के आने के बाद भगवानपुर विधायक ममता राकेश, मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन, कलियर विधायक फुरकान अहमद, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी एवं तीस से अधिक कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए गिरफ्तारी दी। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को पुलिस लाइन ले जाकर हल्के मुचलकों पर छोड़ दिया गया। इससे पूर्व भगवानपुर कांग्रेस विधायक ममता राकेश ने कहा कि लखीमपुर खीरी में वीभत्स घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया है। दो अक्तूबर को देश ने गर्व के साथ महात्मा गांधी जयंती मनाई। इस अवसर पर सभी ने जय जवान जय किसान के नारे लगाए। भाजपा सरकार में हिंसावादी रास्ता अपनाया जा रहा है। जिम्मेदार गृह राज्यमंत्री के बेटे द्वारा किसानों को कुचलने से कांग्रेस ही नहीं पूरा देश आहत हुआ है। कहा कि प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलने जा रही थी। उनको रास्ते में ही रोका उनके साथ अभद्रता कर गिरफ्तार किया गया।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक