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दिव्य योग मंदिर परिसर में कन्या पूजन,स्वामी रामदेव,आचार्य बालकृष्ण ने लिया आर्शीवाद


 हरिद्वार। कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर परिसर में गुरूवार को महानवमी पर्व पर स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने कन्या पूजन किया। 9 दिनों तक चले वैदिक अनुष्ठान का समापन पूरी विधि-विधान के साथ किया गया, जिसमें गायत्री की उपासना की गई। स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने कन्याओं के चरण धोकर उन्हें प्रसाद के रूप में भोजन करवाया और आर्शीवाद प्राप्त किया। इस अवसर स्वामी रामदेव ने कहा कि नवरात्रों के 9वें दिनों में माँ शक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करने का प्रावधान है। इस दिन को हम अधर्म पर धर्म की जीत के रूप में मनाते हैं। आज देश में जिस प्रकार से अधर्म, आतंकवाद, मंहगाई, गरीबी एवं बेरोजगारी बढ़ रही है। यह देश पुनः श्रीराम व श्रीकृष्ण का भारत बने, वीर-वीरागंनाओं का भारत बने, आज इसकी महती आवश्यकता है। इस कार्य के लिए सभी को कठोर पुरुषार्थ करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि, शान्ति व वैभव हो। हम संकल्पबद्ध हैं कि योग, आयुर्वेद, स्वदेशी एवं अन्य प्रकल्पों के माध्यम से अर्जित अर्थ से परमार्थ करते हुए इस देश को बहुत आगे ले जाएँगे। आयार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति परम्परा और सनातन हिन्दू परम्परा में नवरात्रों की विशेष महत्ता है। हमारी संस्कृति, परम्परा और हमारे पूर्वजों की विधा का अनुसरण करते हुए हमने 9 दिन उपवास करके रामनवमी के पावन अवसर पर वृहद् यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि हम देवी के रूप में परमात्मा का स्मरण करते हैं, उनकी उपासना करते हैं। पतंजलि परिवार ने भी 9वें दिनों तक यज्ञ एवं अनुष्ठान किया, जिसमें हमने गायत्री की उपासना की। उसके उपरान्त कन्याओं को भोजन प्रसाद का भोग लगाकर नवरात्रों का समापन किया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पर्व हमारी समृद्धशाली परम्परा का हिस्सा है। इसको उद्दात्ता व वैज्ञानिकता के साथ मनाना हमारा सबका कर्त्तव्य भी है, जिसका निर्वहन पतंजलि परिवार पूरी निष्ठा के साथ कर रहा है। उन्होंने समस्त देशवासियों को विजयदशमी की शुभकामनाएँ प्रस्तुत करते हुए कहा कि कल विजयदशमी का पर्व हमारे गौरव का प्रतीक है। रोग, शोक और बीमारी से मुक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकें। इस अवसर पर साध्वी देवप्रिया, बहन ऋतम्भरा, रामभरत, अजय आर्य, बहन अंशुल, बहन पारूल, भाई राकेश, साध्वी देवादिति, साध्वी देवविजया आदि उपस्थित रहे। 


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