Skip to main content

दशरथ दरबार, रामराज्य घोषणा एवं राम वन गमन की लीला का हुआ मंचन

 


हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजिस्टर्ड ने आज दशरथ दरबार, रामराज्य घोषणा एवं राम वन गमन की लीला का मंचन कर संदेश दिया कि विधि का विधान और देश का संविधान सर्वाेपरि होता है। त्रेता एवं द्वापर युग में दैवीय सत्ता से देश और समाज का संचालन होता था। यह दैवीय सत्ता का ही चमत्कार था कि होना था भगवान श्री राम का राजतिलक और हो गया 14 वर्ष का वनवास, क्योंकि यदि राम राजा बन जाते तो उनके अवतार का हेतु समाप्त हो जाता। श्रीरामलीला कमेटी के मुख्य दिग्दर्शक भगवत शर्मा मुन्ना एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील भसीन के निर्देशन में कराए गए मंचन के माध्यम से संपूर्ण जनमानस को संदेश दिया गया कि स्वार्थ की भावना जागृत होने पर सामाजिक मान्यताएं और पारिवारिक संस्कार सभी विलुप्त हो जाते हैं। रंगमंच पर त्रियाहठ और राजधर्म का भी जीवंत दर्शन कराया गया। रंगमंच की भव्यता हेतु पात्रों की रूप सज्जा एवं वेशभूषा में रमन शर्मा एवं विनोद शर्मा की कलाकृति भी इस आयोजन को बड़ी रामलीला होने का गौरव प्रदान करती है। दशरथ दरबार में जैसे ही रामराज्य की घोषणा हुई तो इंद्रलोक में खलबली मच गई, सभी देवताओं ने मां सरस्वती का आवाहन कर उनसे मंथरा एवं केकई का हृदय परिवर्तन कराया और केकई ने राजा दशरथ से दो वरदान मांग कर अपने पुत्र भरत को राजगद्दी तथा राम को 14 वर्ष का वनवास कराया। रामलीला के दृश्यों में मौलिकता ,प्रेरणा एवं संवेदना के भाव भरने में जिन पदाधिकारियों का योगदान है उनमें प्रमुख हैं श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र चड्ढा, महामंत्री महाराज कृष्ण सेठ, संपत्ति कमेटी के मंत्री रविकांत अग्रवाल ,मंच संचालक एवं मंत्री डॉ संदीप कपूर एवं प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ,कोषाध्यक्ष रविंद्र अग्रवाल, दृश्य एवं विद्युत व्यवस्था संचालक अनिल सखूजा,विशाल गोस्वामी ,रमेश खन्ना ,संगीत दिग्दर्शक विनोद नयन ,पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, मनोज बेदी,विरेन्द्र गोस्वामी, सुरेंद्र अरोड़ा एवं ऋषभ मल्होत्रा सहित संपूर्ण कार्यकारिणी एवं सदस्यों का योगदान सराहनीय है जबकि अपनी पात्रता के माध्यम से दर्षकों की प्रसंशा प्राप्त करने वालों मे साहिल मोदी, अंकित तिवारी, सुनील शर्मा, मोहित गिरी,अर्जुन चैहान, एवं शिवचरण सूद भी साधुवाद के पात्र हैं। रविवार को पंचवटी,सुंदरी सूर्पनखा, खरदूषण वध ,रावण दरबार ,सीता हरण एवं जटायु वध की लीला का मंचन किया जाएगा।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक