Skip to main content

और अब जिला कारागार में कैदियों ने किया रामलीला का मंचन,निकाली राम की बारात

 


हरिद्वार। जिला कारागार में निरूद्व कैदी भी अपराध की प्रवृति को छोड़कर सामाजिक और धार्मिक तौर पर बदलने का प्रयास कर रहे है। यही वजह है कि इस बार रोशनाबाद स्थित जिला जेल में कैदियों ने रामलीला का मंचन करते हुए भगवान राम के आदर्शो को आत्मसात करने को प्रयासरत है। जिला कारागार में चल रही रामलीला में आज सीता के स्वयंवर के बाद राम बरात का आयोजन किया गया। जिला कारागार में बंद कैदियों द्वारा राम बारात में जमकर डांस किया। राम बरात की जिला कारागार में तपस्थली से प्रारंभ होकर एकलव्य बेरिक तक निकाली गई, जिसमें सभी कैदियों ने प्रतिभाग किया। संभवतः ऐसा पहली बार हो रहा है कि हरिद्वार की जिला कारागार में रामलीला का आयोजन हो रहा है और उसमें आज निकली राम बरात निकाली गई हो। इस खुशी के माहौल पर जिस तरह बारातियों के स्वागत में पकवान बनाए जाते हैं। आज जिला कारागार में खीर पूरी सब्जी बनाई गई जिसे सभी कैदियों ने एक साथ मिलकर बैठकर खाया। जेल अधीक्षक मनोज आर्य की पहल पर सजा काट रहे कैदी रामलीला का मंचन कर भगवान् के आदर्शो पर चलने का पाठ सीख रहे है। सोमवार शाम को बड़ी धूमधाम के साथ जेल परिसर में ही भगवान राम की बारात निकाली गई। इस दौरान कैदियों ने उत्साह के साथ भगवान राम के जयकारों का उद्घोष किया। जिला कारागार में गणेश पूजन के साथ रामलीला की शुरुआत हुई। जेल अधीक्षक मनोज आर्य की पहल पर जेल परिसर में आयोजित रामलीला में कैदी भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण सहित रामलीला के अन्य पात्रों के किरदार निभा रहे हैं। दशहरे तक होने वाली रामलीला के मंचन के लिए कैदियों ने महीने भर तक रिहर्सल कर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। रामलीला में अभिनय कर रहे कैदी दीपक और त्रिभुवन का मानना है कि ऐसे धार्मिक मंचन कैदियों को अपराध की दुनिया से निकलने में सहायक है और रामलीला के मंच पर अभिनय कर उन्हें बहूत ही धार्मिकता का अनुभव हो रहा है। जेलर मनोज कुमार आर्य ने कहा कि कैदियों में देश प्रेम एवं आध्यात्मिक भावना को उजागर करना और उच्च गुणों का विकास करना ही उनकी प्राथमिकता है।रामलीला मंचन जैसे आयोजन कैदियों की मानसिकता को बदलने में बहुत सहायक होते हैं।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक