Skip to main content

शहर में बनी पार्किंगों से हर महीने पांच हजार रुपये स्वच्छता शुल्क लिया जाएगा

 नगर निगम की बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित

हरिद्वार। नगर निगम की बोर्ड बैठक में कई प्रस्ताव पारित किये गये,जबकि कुछ प्रस्तावों को पार्षदों के विरोध के बाद निरस्त कर दिया गया।  सोमवार को टाउन हाल में हुई नगर निगम बोर्ड की बैठक दोपहर करीब 12 बजे शुरू की गई। बैठक में नगर आयुक्त की ओर से प्रस्ताव रखा गया,जिसका कुछ पार्षदों ने विरोध किया। बोर्ड बैठक मे तय किया गया कि अब  नगर निगम बैंक्वेट हॉल संचालकों से प्रत्येक शादी पर एक हजार रुपये का शुल्क वसूल करेगा। जबकि शहर में बनी पार्किंगों से भी हर महीने पांच हजार रुपये का स्वच्छता शुल्क लिया जाएगा। अस्थाई ढ़ाबे, रेहड़ी, ठेली वालों से प्रति दिन शुल्क लिया जाएगा। इन प्रस्तावों पर निगम की बोर्ड बैठक में मुहर लगा दी गई है। कई अन्य प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी गई। बैठक में प्रस्तावों को लेकर कुछ ही पार्षदों ने आपत्ति जताई। सबसे पहले बैठक में निगम क्षेत्र के सभी वेंडिंग प्वाइंट (बैंक्वेट हॉल) से प्रति शादी पर एक हजार रुपये का शुल्क लिए जाने का प्रस्ताव अधिकारियों ने पढ़कर सुनाया। इस पर कांग्रेसी पार्षद उदयवीर चैहान ने आपत्ति जताई और शुल्क को और बढ़ाने की मांग की। जबकि अन्य पार्षदों ने एक हजार रुपये का ही शुल्क रखे जाने के साथ ही प्रस्ताव को पास सर्वसम्मति से पास किया। इसके साथ ही नगर निगम क्षेत्र में संचालित होने वाली पार्किंगों से पांच हजार रुपये प्रतिमाह स्वच्छता शुल्क और प्रतिदिन अस्थाई ढाबों से 50 रुपये और रेहड़ी, ठेली आदि से 20 रुपये लिए जाने के प्रस्ताव को भी पास कर दिया गया। इसमें पहले 50 रुपये के शुल्क में 10 और 20 रुपये शुल्क में पांच रुपये का कमीशन लेने की बात भी रखी गई। लेकिन इस पर पार्षदों ने आपत्ति जताई तो कमीशन के बिंदु को निरस्त कर दिया गया। उत्तरी हरिद्वार में पावनधाम आश्रम के समीप खाली पड़ी निगम की भूमि को विकसित करने के लिए प्रेम प्रकाश आश्रम को देने और विकसित के बाद नगर निगम को ही हैंडओवर करने के प्रस्ताव का भाजपा पार्षद अनिल मिश्रा ने जमकर विरोध किया। इसके बाद कई और पार्षद भी विरोध में उतर आए। जिससे इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया। पुस्तकालय के लिए दो लाख रुपये की रकम जारी करने का प्रस्ताव रखने पर बोर्ड बैठक में कांग्रेसी पार्षदों का पारा चढ़ गया। भाजपा पार्षद के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया और उसे पास नहीं होने दिया। बोर्ड बैठक में भाजपा पार्षद अनिरुद्ध भाटी ने नगर निगम के अधीन आने वाले पुस्तकालयों में पुस्तक व अन्य सामान के लिए दो लाख रुपये तक देने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को देख कांग्रेसी पार्षद अनुज सिंह, राजीव भार्गव, सुहेल अख्तर, दीपिका बहादुर, जफर अब्बासी, मेहरबान खान आदि ने विरोध शुरू कर दिया। मेयर अनिता शर्मा ने भी कहा कि पुस्तकालयों का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जबकि उन्होंने मौके पर निरीक्षण किया था तो वहां खंडहर में तब्दील भवन मिले। ऐसे में दो लाख रुपये जारी करने का प्रस्ताव ठीक नहीं है। अनुज सिंह ने कहा कि मेयर की जांच में पुस्तकालय ही नहीं मिले थे। ये एक बहुत बड़ा घोटाला है। इसके दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। विद्युत अधिकारी और कर्मचारियों ने एक बार फिर से 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक कर हड़ताल को लेकर विचार-विमर्श किया। छह अक्तूबर को सुबह आठ बजे से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। बैठक में मेयर अनिता शर्मा, नगर आयुक्त दयानंद सरस्वती, कर एवं राजस्व अधीक्षक राहुल कैंथोला, सुनीता सक्सेना, वेदपाल आदि शामिल रहे।


Comments

Popular posts from this blog

गौ गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया

  हरिद्वार। कुंभ में पहली बार गौ सेवा संस्थान श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा राजस्थान की ओर से गौ महिमा को भारतीय जनमानस में स्थापित करने के लिए वेद लक्ष्णा गो गंगा कृपा कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया है।  महोत्सव का शुभारंभ उत्तराखंड गौ सेवा आयोग उपाध्यक्ष राजेंद्र अंथवाल, गो ऋषि दत्त शरणानंद, गोवत्स राधा कृष्ण, महंत रविंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी ने किया। महोत्सव के संबध में महंत रविंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि इस महोत्सव का उद्देश्य गौ महिमा को भारतीय जनमानस में पुनः स्थापित करना है। गौ माता की रचना सृष्टि की रचना के साथ ही हुई थी, गोमूत्र एंटीबायोटिक होता है जो शरीर में प्रवेश करने वाले सभी प्रकार के हानिकारक विषाणुओ को समाप्त करता है, गो पंचगव्य का प्रयोग करने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, शरीर मजबूत होता है रोगों से लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक महामारी ने सभी को आतंकित किया है। परंतु जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है। कोरोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता है। उन्होंने गो पंचगव्य की विशेषताएं बताते हुए कहा कि वर्तमा

माता पिता की स्मृति में समाजसेवी राकेश विज ने किया अन्न क्षेत्र का शुभारंभ

हरिद्वार। समाजसेवी और हिमाचल प्रदेश प्रदेश के पालमपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश विज ने बताया कि महाकुंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधार्थ संत बाहुल्य क्षेत्र सप्त ऋषि आश्रम में अन्न क्षेत्र का शुभारंभ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी के कर कमलों के द्वारा किया गया है। यह अन्न क्षेत्र पूरे कुंभ तक अनवरत रूप से चलेगा। उन्होंने बताया कि मानवता सबसे बड़ी पूजा है मानव धर्म ही हमें जोड़ता है। अन्नदान की परंपरा हमारी वैदिक परंपरा है। अन्न क्षेत्र का आयोजन उन्होंने अपनी माता त्रिशला रानी और पिता लाला बनारसी दास की स्मृति में कराया है। उन्होंने बताया कि गुरूद्वारा गुरू सिंह सभा में भी 7 मार्च से रोजाना लंगर का आयोजन किया जा रहा है। 14 मार्च से इच्छाधारी नाग मंदिर बीएचएल हरिद्वार में भी अन्न क्षेत्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा कनखल स्थित सती घाट के समीप निर्माणाधीन गुरु अमरदास गुरुद्वारे और एसएमएसडी इंटर कॉलेज में पंडित अमर नाथ की स्मृति में बनने वाले पुस्तकालय में भी सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि महापुरुषों के रास्ते पर चलकर ही हम देश को समृद्ध कर सकते है। इस अवसर पर सतपाल

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक