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प्रथम गुरु गुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव पंचपुरी के गुरुद्वारों में धूमधाम से मनाया गया

 हरिद्वार। सिक्ख समाज के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव पंचपुरी के गुरुद्वारों में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारों में दीवान सजाया गया और सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी रहा। श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारे पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के आगे माथा टेका और सुख शांति की कामना की। ज्वालापुर स्थित गोल गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा वेरी स्वीट गुरु नानक दरबार गुरुद्वारा आदि में प्रकाशोत्सव पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। गोल गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे मेयर अनीता शर्मा ने कहा कि सभी को गुरु नानक देव के बताए मार्ग पर चलकर अपना जीवन सफल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव ने भाईचारे का संदेश पूरे विश्व में दिया। प्रदेश भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा कि सिख समाज हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर प्रतिभाग करता है। देश की आजादी में भी सिख समाज का अहम योगदान रहा है। भेल कार्यपालक निदेशक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि सिख समाज के कार्यों की देश विदेश में एक अलग पहचान है। उसके गुरु मानवता का संदेश दिया। इस अवसर पर मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा, पार्षद अनुज सिंह, सुखदेव सिंह, बलबीर सिंह, हरभजन सिंह, उज्जल सिंह, करमजीत सिंह, अमरीक सिंह, रविंद्र सिंह, विक्रम सिंह सिद्धू, करतार सिंह, अनूप सिंह, रमणीक सिंह, गुरजिंदर सिंह, कुंवर बाली, विक्रम सिंह, हरविंदर सिंह, डीएस मान, हरप्रीत सिंह, अरिजीत सिंह, हरजीत सिंह, जसपाल सिंह, भोला सिंह, अवतार सिंह, मेहताब सिंह, वासन सिंह, हरदेव कौर, परमजीत कौर, दलजीत कौर, संजय गुलाटी आदि उपस्थित थे।


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ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक