Skip to main content

शांतिकुंज में उत्साहपूर्वक मनाई गई श्री गुरु नानक व लक्ष्मीबाई जयंती

 


हरिद्वार सिक्ख संप्रदाय के प्रथम श्री गुरु नानकदेव जी एवं रानी लक्ष्मी बाई की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गयी। इस अवसर पर शांतिकुंज के पीतवस्त्रधारी साधकों ने जन जागरण रैली निकाली। वरिष्ठ कार्यकर्त्ता शिवप्रसाद मिश्र ने रैली को शांतिकुंज के देवात्मा हिमालय परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में गुरु नानकदेव के जीवन से जुड़े अनेक प्रसंग एवं रानी लक्ष्मी बाई की वीरता पर स्लोगन दोहराये गये। पीतवस्त्रधारी भाई-बहिन अपने-अपने गले में सद्ग्रंथ लेकर चल रहे थे। जन जागरण रैली हरिपुर कलॉ, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर से होते हुए शांतिकुंज के पावन समाधि स्थल पहुुँची, जहाँ महिला मण्डल की बहिनों ने आरती कर स्वागत किया।अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि गुरु नानक देव जी समाज को जागरुक करने के उद्देश्य सदैव परिव्रज्या करते रहे। उन्होंने धर्म संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता के लिए कार्य किया है। श्री गुरु नानकदेव जी एक दार्शनिक, समाज सुधारक, कवि, गृहस्थ, योगी और देशभक्त भी थे। गायत्री परिवार प्रमुख ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई आदर्श वीरांगना थीं। वे कभी समस्याओं से नहीं घबराई, उन्हें अपने कर्तव्य पालन से किसी प्रलोभन ने विमुख नहीं कर सका। वह सदैव अपने पवित्र उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आत्मविश्वास से भरी रहीं। व्यवस्थापक श्री महेन्द्र शर्मा ने कहा कि श्री गुरु नानकदेव जी का जीवन और शिक्षाएँ न केवल धर्म विशेष के लिए, वरन् पूरी मानव जाति को सही दिशा दिखाती हैं। रानी लक्ष्मी बाई के जीवन के अनेक प्रसंगों को याद किया। गुरु नानक जयंती एवं रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर शांतिकुंज में दीपमहायज्ञ सहित विभिन्न आयोजन संपन्न हुए।


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक