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ब्रह्मलीन संन्यासिनी माता ललिताम्बा की 15वीं पुण्यतिथि पर संतो ने दी श्रद्वांजलि

 


हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री मानव कल्याण आश्रम हरिद्वार, बद्रीनाथ की संस्थापिका ब्रह्मलीन संन्यासिनी माता ललिताम्बा की 15वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आश्रम के महंत स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती के संचालन में श्रद्धाजंलि समारोह व वार्षिक भण्डारा सम्पन्न हुआ। श्रद्धाजंलि समारोह को सम्बोधित करते हुए श्रीमहंत देवानन्द सरस्वती जी महाराज ने ब्रह्मलीन माता ललिताम्बा और उनके परम शिष्य ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती को स्मरण कर गौरक्षा आन्दोलन, राम जन्म भूमि आन्दोलन में उनकी अहम भूमिका को नमन करते हुए कहा कि माता ललिताम्बा त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति थी। उन्हांेने गौ संरक्षण व धर्म प्रचार को अपना जीवन समर्पित किया। आचार्य हरिहरानन्द व स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि मानव कल्याण आश्रम सदैव धर्म प्रचार और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। हरिद्वार और बद्रीनाथ, अहमदाबाद में जिस प्रकार श्रद्धाभाव के साथ आश्रम तीर्थयात्रियों की सेवा की जाती है वह सेवाप्रकल्प का अनुपम उदाहरण है।मानव कल्याण आश्रम के मैनेजिंग ट्रस्टी अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि शंकराचार्य स्मारक समिति, शंकराचार्य चैक की स्थापना में पूज्य माता ललिताम्बा जी का विशेष योगदान रहा। विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने गौरक्षा हेतु प्रचण्ड आन्दोलन चलाया तथा हरिद्वार, अहमदाबाद, बद्रीनाथ स्थित मानव कल्याण आश्रमों की स्थापना में माता ललिताम्बा की प्रेरणा और योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। महंत दिनेश दास व स्वामी सुतीक्ष्ण मुनि ने कहा कि गौरक्षा आन्दोलन के माध्यम से ललिताम्बा माता ने समस्त देश में गौरक्षा की अलख जगायी थीं। गौरक्षा आन्दोलन में भाग लेते हुए उन्हांेने जेलयात्रा भी की। श्री मानव कल्याण आश्रम के महंत स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि पूज्य ललिताम्बा माता व स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा चलाये गये सेवा के प्रकल्पों को संस्था द्वारा निरन्तर संचालित किया जा रहा है। श्री ललिताम्बा देवी ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष रेणुका बेन ठक्कर ने कहा कि ब्रह्मलीन माता ललिताम्बा ने जिस निडरता के साथ गौहत्या विरोधी आन्दोलन में भाग लेेते हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का घेराव करने का साहस दिखाया उससे तो यही साबित होता है कि माता ललिताम्बा एक धर्मरक्षक, निर्भीक संत थी जिन्हांेने निज धर्म और गौमाता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह न करते हुए आन्दोलन को धार देने का कार्य किया। श्रद्वांजलि समारोह में महंत दिनेश दास, स्वामी हितेश्वरानन्द, स्वामी कृष्णानन्द, स्वामी संतोषानन्द, संतोष ध्यानी, स्वामी कृष्णा पुरी, प्रशादानन्द, स्वामी मंजूनाथ, अर्पित मिश्रा, पार्षद विनित जौली, पत्रकार संजय वर्मा, विनित गिरि, ब्रह्मदत्त, सुरेन्द्र मिश्रा, रूपेश शर्मा, नितिन गिरि, अंकुर राजपूत, निमेश शर्मा समेत अनेक संत-महंत व गणमान्यजन उपस्थित रहे।


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