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विस चुनाव में प्रत्याशियों के लिए व्यय की सीमा 30.80 लाख निर्धारित

 हरिद्वार। जिलाधिकारी विनय शंकर पाण्डे ने बताया कि चुनाव प्रत्याशियों के लिए व्यय की सीमा 30.80 लाख निर्धारित की गयी है। सभी प्रत्याशियों को अपने खर्चे का निर्धारित प्रारूप पर विवरण संकलित करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि अगर कहीं पर नियमानुसार इसका पालन नहीं होता है, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह बात उन्होंने बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में आगामी विधान सभा चुनाव में व्यय लेखा अनुवीक्षण व रेट लिस्ट को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कही। उन्होंने कहा कि व्यय अनुवीक्षण टीमें अपने कार्य के दौरान मतदाताओं को रिश्वत देने वाले और निर्वाचन प्रक्रिया को दूषित करने वालों के खिलाफ एक प्रभावी तंत्र के रूप में कार्य करेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि राजनीतिक दल या उनके प्रतिनिधियों को कहीं पर भी अगर कोई दिक्कत आती है, तो संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मुख्य विकास अधिकारी डा. सौरभ गहरवार एवं नोडल अधिकारी निर्वाचन व्यय लेखा नीतू भंडारी ने प्रत्याशियों द्वारा किये जाने वाले व्यय, आदर्श आचार संहिता सहित चुनाव से जुड़े हुये विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।बैठक मेंवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा.योगेंद्र रावत,अपर जिलाधिकारी(वित्त एवं राजस्व) वीर सिंह बुदियाल, अपर जिलाधिकारी(प्रशासन) पीएल शाह समेत विभिन्न राजनीतिक दलों से विजय वाल सिंह, महेंद्र सिंह वर्मा, वैभव दीक्षित, शाहीन गोयल, रविंद्र कुमार, ओम प्रकाश सिंह, विधा शरण, कन्हैया राम कार्की और विभिन्न विभागों के अधिकारीगण शामिल रहे।


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ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक