Skip to main content

घर में घुसकर महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में दो महिलाओं सहित 6के खिलाफ मुकदमा दर्ज

 हरिद्वार। कोतवाली रानीपुर क्षेत्रान्गर्त घर में घुसकर डरा-धमकाकर महिला से दुष्कर्म करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दो महिलाओं सहित छह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रानीपुर पुलिस के मुताबिक कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने शिकायत देकर बताया कि वह घर में अकेली थी। तभी मनीष और मोहित ने घर में अंदर घुसकर डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। किसी को बताने पर उसकी बेटियों को जान से मारने की धमकी दी। इसकी जानकारी जब महिला ने अपनी भाभी और मनीष-मोहित की माता को दी तो समझौते के लिए दबाव बनाते हुए मनीष से शादी करने के लिए कहा। पर शादी नहीं कराई। इसके बाद पुलिस में शिकायत की तो पुलिस के दबाव बनने पर मनीष से महिला की शादी कर दी। आरोप है कि शादी के बाद महिला को वैश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया। ऐसा न करने पर बच्चियों जान से मारने की धमकी दी। बाद में मिलकर कागजों पर हस्ताक्षर कराकर अब्दुल रहमान उर्फ मुल्ला को बेचने का सौदा कर दिया। इसके बाद अब्दुल रहमान ने भी महिला के साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में पुलिस को शिकायत करने पर भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि आरोपी मनीष, मोहित, सोनी पत्नी सूरज, सुशीला, सुज पुत्र स्व. जगत सिंह व अब्दुल रहमान के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक