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देवस्थानम् बोर्ड भंग करने पर संत समिति एवं निर्मल अखाड़े ने जताया मुख्यमंत्री का आभार


 हरिद्वार। अखिल भारतीय संत समिति एवं श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल ने देवस्थानम् बोर्ड भंग करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। कनखल स्थित निर्मल अखाड़े में मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए समिति के प्रदेश अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने कहा कि आदि अनादि काल से मठ मंदिरों एवं सिद्ध पीठों का संचालन व प्रबंधन संत समाज या तीर्थ पुरोहितों द्वारा ही किया जा रहा है। सदियों से चल रही इस परंपरा को बदलना उचित नहीं है। धार्मिक संस्थाओं के धन का उपयोग सामाजिक कार्यो व मठ मंदिरों के जीर्णोद्धार तथा सौन्दर्यकरण में ही किया जाना चाहिए। देवस्थानम बोर्ड भंग कर धामी सरकार ने सराहनीय निर्णय लिया है। इस निर्णय को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। उन्हांेंने कहा कि हाल ही में अखिल भारतीय संत समिति ने दिल्ली के कालका जी मंदिर में विशाल संत समागम का आयोजन कर मठ मंदिरों के अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग उठायी थी। उत्तराखण्ड सरकार ने संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए देवस्थानम् बोर्ड को भंग कर दिया। अब केंद्र सरकार को पूरे देश में अधिग्रहित मठ मंदिरों को मुक्त करने तथा भविष्य में अधिग्रहण से बचाने के लिए कानून बनाना चाहिए। महंत जसविन्दर सिंह महाराज ने बताया कि देवस्थानम् बोर्ड भंग करने पर अखाड़ा परिषद की ओर से जल्द ही कार्यक्रम का आयोजन कर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया जाएगा। संत समिति के प्रदेश कोषाध्यक्ष महंत अरूण दास महाराज ने कहा कि धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ संत समाज सामाजिक सेवाओं में भी योगदान कर रहा है। देवस्थानम् बोर्ड भंग कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ऐतिहासिक फैसला किया है। निर्मल अखाड़े की एक्कड़ कलां शाखा के महंत अमनदीप सिंह महाराज ने कहा कि मठ मंदिरों, पौराणिक सिद्ध पीठों, आश्रम अखाड़ों के माध्यम से ही सनातन संस्कृति एवं परंपरांओं को निर्वहन देश दुनिया में किया जा रहा है। श्रद्धालु भक्त धर्म संस्कृति हिन्दू संस्कृति को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताते हुए कहा कि निश्चिततौर पर इस फैसले से संत समाज एवं तीर्थ पुरोहित समाज की भावनाओं का सम्मान हुआ है। इस अवसर पर महंत सुखजीत सिंह, महंत अमनदीप सिंह, संत सुखप्रीत सिंह, महंत निर्भय सिंह, संत गज्जन सिंह ज्ञानी, महंत खेम सिंह, संत जसकरण सिंह, संत भूपेंद्र सिंह, संत हरजोध सिंह, संत जरनैल सिंह, संत गुरजीत सिंह, संत तलविंदर सिंह, संत विष्णु सिंह आदि संतजन उपस्थित रहे।


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