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दिव्य महापुरूष थे ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी


 हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा है कि संत परंपरा सनातन संस्कृति की वाहक है और महापुरुषों ने समाज को सदैव नई दिशा प्रदान की है। मायापुर स्थित अखाड़े में ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी महाराज के श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी महाराज एक दिव्य महापुरुष थे। जिन्होंने जीवन पर्यंत अखाड़े की परंपराओं का निर्वहन करते हुए भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान किया। राष्ट्र निर्माण में उनका अहम योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। श्रीमहंत राम रतन गिरी एवं श्रीमहंत ओमकार गिरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी महाराज एक महान संत थे। जिन्होंने अपने तप एवं विद्वत्ता के माध्यम से भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाया और राष्ट्र रक्षा एवं धर्म रक्षा के लिए प्रेरित किया। महंत केशव पुरी एवं वाघम्बरी पीठाधीश्वर महंत बलवीर गिरी महाराज ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी शिक्षाएं अनंत काल तक समाज का मार्गदर्शन करती रहती हैं और ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी महाराज तो साक्षात करुणा की मूर्ति थे। जिन्होंने अपने जीवन काल में अनेकों सेवा प्रकल्प चलाकर गरीब असहाय लोगों की मदद की। श्रीमहंत हरगोविंदपुरी एवं श्रीमहंत राधेगिरी ने महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत प्रकाश गिरी महाराज एक महान विभूति थे। उनके अधूरे कार्यो को पूरा करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। महंत प्रकाश गिरी सरल व सहज स्वभाव के संत थे। इस अवसर पर श्रीमहंत राधे गिरी, श्रीमहंत हरगोविंदपुरी,दिगंबर गंगागिरी,दिगंबर आशुतोष पुरी,दिगंबर राजपुरी, स्वामी मधुर वन, स्वामी रवि वन,स्वामी रघु वन,स्वामी आलोक गिरी, स्वामी महेश पुरी, स्वामी पूर्णानंद गिरी,स्वामी अमित पुरी,दिगंबर कृष्णागिरी,दिगंबर विजय पुरी सहित कई संत महापुरुष उपस्थित रहे।


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