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स्वामी कन्हैया दास महाराज बने ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज के उत्तराधिकारी


 हरिद्वार। भूपतवाला स्थित भजुराम कटीर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में संत समाज ने आश्रम के ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके कृपापात्र शिष्य स्वामी कन्हैया दास महाराज को तिलक चादर भेंटकर आश्रम का महंत नियुक्त किया। श्री रामानन्दी वैष्णव मण्डल के सानिध्य में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी रामकुमार दास महाराज ने कहा कि महापुरूषों का जीवन सदैव समाज कल्याण के लिए समर्पित होता है। ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज ने अपना पूरा जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित करते हुए गरीब, असहायों की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भजुराम कटीर के महंत नियुक्त किए गए स्वामी कन्हैया दास महाराज अपने गुरू के पदचिन्हों पर चलते समाज सेवा में योगदान करेंगे। महंत गोपाल दास महाराज ने कहा कि त्याग व तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज ने समाज को सदैव ज्ञान की प्रेरणा देकर धर्म के मार्ग पर अग्रसर किया। महंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज महान संत एवं समाज के प्रेरणा स्रोत थे। उनसे प्राप्त ज्ञान व शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए उनके शिष्य स्वामी कन्हैया दास महाराज समाज कल्याण में योगदान करेंगे। बाबा हठयोगी एवं महंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि महापुरुष केवल शरीर से त्यागते हैं। उनकी शिक्षाएं अनंत काल तक सदैव समाज का मार्गदर्शन करती रहती हैं। राष्ट्र की एकता अखंडता बनाए रखने में उनका अतुल्य योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। महंत प्रह्लाद दास महाराज एवं महंत अरूणदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज की शिक्षाओं का अनुकरण करते हुए राष्ट्र व समाज की सेवा का संकल्प ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नवनियुक्त महंत स्वामी कन्हैया दास महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन महंत भजुराम दास महाराज विलक्षण संत थे। शारीरिक रूप से वे भले ही मौजूद नहीं है। लेकिन आत्मीय रूप से उनका मार्गदर्शन सदैव मिलता रहेगा। उनके दिए ज्ञान व शिक्षाओं के अनुसार संत महापुरूषों व समाज के गरीब, असहाय वर्गो की सेवा करते हुए सनातन धर्म, संस्कृति का प्रचार प्रसार करना ही उनका लक्ष्य है। इस अवसर पर महंत नारायण दास पटवारी, महंत बिहारी शरण, महंत अंकित शरण, स्वामी रवि देव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महंत सूरज दास, महंत रघुवीर दास आदि सहित बड़ी संख्या में संतजन उपस्थित रहे।


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