Skip to main content

एक जनवरी तक परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेगे महाविद्यालय के छात्र-डा.सुनील बत्रा

 


हरिद्वार। एस.एम.जे.एन. (पी.जी.) काॅलेज के प्राचार्य डा.सुनील कुमार बत्रा ने बताया कि महाविद्यालय के बी.ए., बी.काॅम. तथा बी.एससी. तृतीय व पंचम् सेम व एम.ए. तथा एम.काॅम. तृतीय सेमेस्टर के (स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर को छोड़कर) मुख्य परीक्षा व बैक पेपर परीक्षा के लिए आवेदन पत्र व परीक्षा शुल्क विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर लाॅगइन करके भरे जा रहे हैं। आॅनलाईन आवेदन पत्र व परीक्षा शुल्क जमा करने की अन्तिम तिथि 1 जनवरी 2022 है। आवेदन पत्र की हार्ड काॅपी महाविद्यालय में 1 जनवरी, 2022 तक जमा करानी होगी। प्राचार्य डाॅ. सुनील कुमार बत्रा ने बताया कि आवेदन पत्र के साथ काॅलेज का परिचय पत्र, अंकतालिका, परीक्षा शुल्क की रसीद संलग्न करनी अनिवार्य है। उक्त सेमेस्टर का परीक्षा शुल्क विश्वविद्यालय की वेबसाईट पर छात्र-छात्रा स्वयं ही आॅनलाईन जमा करायेंगे। आवेदन-पत्र की हार्डकाॅपी महाविद्यालय में जमा करने के पश्चात ही महाविद्यालय प्रशासन द्वारा वैरीफाई किया जायेगा। छात्र-छात्रा के परीक्षा आवेदन पत्र को महाविद्यालय के वेरीफिकेशन के पश्चात छात्र अपना प्रवेश-पत्र डाउनलोड कर सकता है। यदि किसी छात्र को परीक्षा आवेदन पत्रा भरने में किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो वह ई गवर्नेंस हेल्प की ईमेल पर मेल करके समस्या का समाधान पा सकते हैं। डाॅ. बत्रा ने बताया कि निर्धारित तिथि तक अपना परीक्षा आवेदन पत्र जमा न करने पर समस्त उत्तरदायित्व सम्बन्धित छात्र-छात्रा का होगा। इस तिथि के पश्चात् परीक्षा आवेदन पत्र विलम्ब शुल्क के साथ भरे जा सकेंगे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक