Skip to main content

स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति ने दी शहीद सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि

 


हरिद्वार। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति ने जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नि मधुलिका रावत के साथ विमान हादसे का शिकार सभी सेना अधिकारियों के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नगर निगम के निकट यूनियन भवन में आयोजित शोक सभा के दौरान  भारत के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ विपिन रावत, उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत के साथ ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, विंग कमांडर पीएस चैहान, स्क्वेड्रन लीडर के सिंह, जेडब्ल्यूओ दास, प्रदीप ए, नायक गुरु सेवक सिंह, जितेन्द्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार, साईं तेजा और हवलदार सतपाल को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए समिति के महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने कहा कि जनरल बिपिन रावत असाधारण प्रतिभा के धनी, देश की आन-बान और शान थे। उनके व अन्य सैन्य अधिकारियों के विमान दुघर्टना में आकस्मिक निधक से देश को भारी क्षति हुई है। जिसे कभी पूरा नहीं किया जाएगा। कार्यकारी अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार सैनी ने कहा कि जनरल बिपिन रावत देश के अनमोल रत्न थे। देश के प्रति उनकी कर्तव्यपरायता से प्रभावित होकर दुश्मन राष्ट्र भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैंै। देश के ऐसे सपूत का अचानक चले जाना बेहद दुखद है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार ने कहा कि जनरल बिपिन रावत शूरवीर व सच्चा राष्ट्र प्रहरी थे। उपाध्यक्ष मुरली मनोहर ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि इस बेहद दुखद हादसे की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच किया जाना आवश्यक है। अशोक टंडन, राजन कौशिक जनरल बिपिन रावत को नमन करते हुए कहा कि विमान दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और जांच के निष्कर्षों को जनता के सामने भी लाया जाना चाहिए। मार्गदर्शक मंडल के सदस्य सुभाष घई, उपाध्यक्ष डा.विनोद उपाध्याय, डा.वेदप्रकाश आर्य, ललित कुमार चैहान रमेश कुमार, नरेंद्र कुमार वर्मा, वीरेन्द्र गहलौत, राजेन्द्र गहलोत, कैलाश वैष्णव, अशोक कुमार चैहान, सुभाष चन्द्र चैहान, जय प्रकाश आर्य, शिव कुमार, सुमित्रा देवी, गीता देवी ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक