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धन सिंह नेगी बने प्रांतीय कार्यवाहक अध्यक्ष,

 हरिद्वार। उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ के अधिवेशन में पदाधिकारियों का निर्विरोध चुनाव किया गया। शाखा अध्यक्ष रहे धन सिंह नेगी को सर्वसम्मति से प्रांतीय कार्यवाहक अध्यक्ष चुना गया। शाखा अध्यक्ष अशोक हरदयाल को चुना गया। इनके साथ ही सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों का फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। बुधवार को नगर निगम के समीप जल संस्थान के जलकल अभियंता कार्यालय परिसर में उत्तराखंड जल संस्थान कर्मचारी संघ के अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन के दौरान पदाधिकारियों का निर्विरोध चुनाव करते हुए संरक्षक धन सिंह नेगी और सलाहकर भारत सिंह रावत को चुना गया। शाखा अध्यक्ष अशोक हरदयाल, उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह रावत, सचिव अमित कुमार, कोषाध्यक्ष नत्थी सिंह बिष्ट, मीडिया प्रभारी प्रवीण सैनी, प्रचार सचिव दिनेश चैहान, संगठन सचिव संजय शर्मा, संप्रेक्षक सौरभ चैहान, कार्यालय सचिव अमित गोयल, संयुक्त सचिव दिवाकर को चुना गया। प्रांतीय कार्यवाहक अध्यक्ष धन सिंह नेगी ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को प्रांतीय स्तर पर उठाते हुए समाधान कराने के लिए संघर्ष किया जाएगा। शाखा अध्यक्ष अशोक हरदयाल ने कहा कि जल संस्थान और जल निगम के एकीकरण को लेकर जल्द एक आंदोलन किया जाएगा। प्रांतीय स्तर पर बैठक होने के बाद आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान प्रांतीय महामंत्री रमेश बिंदोला, मंडलीय अध्यक्ष श्याम सिंह नेगी, संयुक्त मोर्चा के सलाहकार चंद्रबल्लभ गैरोला, महामंत्री शिशुपाल सिंह रावत, प्रांतीय मीडिया प्रभारी संदीप मल्होत्रा आदि शामिल रहे।


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ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक