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बैंक प्रबंधक को पाया सेवा में कमी का दोषी, ब्याज के साथ 22हजार के निर्देश

 हरिद्वार। जिला उपभोक्ता आयोग ने लोन आवेदन स्वीकृत हो जाने के बाद भी धनराशि अदा न करने के मामले में बैंक प्रबंधक और जिला प्रबंधक उत्तराखंड बहुउद्देश्यीय वित्त विकास निगम को उपभोक्ता सेवा में कमी करने का दोषी पाया है। आयोग ने दोनों को साढ़े 22 हजार रुपये छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से क्षतिपूर्ति देने के साथ ही शिकायर्ता के खर्च के रूप में पांच हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। अधिवक्ता संजय कुमार चैहान ने बताया कि ग्राम इब्राहिमपुर बहादराबाद निवासी शिकायतकर्ता पलटू राम पुत्र मंगलू ने स्थानीय शाखा प्रबंधक, इंडियन ओवरसीज बैंक रोहलकी के किशनपुर, बहादराबाद हरिद्वार और जिला प्रबंधक, उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम हरिद्वार के खिलाफ एक शिकायत दायर की थी। बताया कि 2008-09 में उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम रोशनाबाद के माध्यम से किराने की दुकान के लिए 50 हजार रुपये का लोन आवेदन किया था। शिकायतकर्ता ने लोन आवेदन पत्र के साथ अपने सभी कागजात निगम और बैंक प्रबंधक को दिए थे। स्थानीय बैंक ने शिकायतकर्ता से कुछ कोरे कागज पर भी हस्ताक्षर कराकर लोन मंजूर हो जाने की जानकारी एक हफ्ते के बाद आने की बात कही थी। इसके बाद बैंक उन्हें लगातार टालता रहा। इस बीच नवंबर 2016 में उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम के माध्यम से एक लोन वसूली नोटिस भेजकर विभाग की योजना के अधीन दिए गए लोन की मार्जिन मनी साढ़े 12 हजार रुपये जमा न करने पर कुल बकाया 18 हजार रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने वित्त विकास निगम के कार्यालय में जाकर संपर्क किया, तो विभाग ने बताया कि शिकायतकर्ता का लोन स्वीकृत होने पर विभाग से साढ़े 22 हजार रुपये चेक बैंक के माध्यम से दिया गया था।उक्त लोन राशि में 10 हजार रुपये अनुदान राशि व साढ़े 12 हजार रुपये शिकायतकर्ता को लोन देने के बाद मार्जिन मनी के रूप में विभाग को वापस जमा करने थे। जिस पर शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों को बताया कि उसे बैंक से कभी भी कोई लोन नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने दोनों को अपने अधिवक्ता के माध्यम से एक नोटिस भेजा था। लेकिन कोई सुनवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया। आयोग अध्यक्ष कंवर सैन व सदस्य विपिन कुमार ने दोनों प्रबन्धक को उपभोक्ता सेवा में कमी का दोषी ठहराया है।


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