Skip to main content

41 दिवसीय विराट शिव शक्ति महायज्ञ में शामिल हुये संत


 हरिद्वार। राजमाता आशा भारती महाराज ने कहा कि वरदायिनी सिद्धपीठ नागेश्वर महादेव गद्दी पर श्रद्धापूर्वक की गयी आराधना को स्वीकार कर भगवान शिव श्रद्धालु भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भूपतवाला स्थित निराला धाम आश्रम में आयोजित 33वें 41 दिवसीय विराट शिव शक्ति महायज्ञ तथा ब्रह्मलीन ब्रह्मऋषि स्वामी कृष्णानन्द महाराज एवं ब्रह्मलीन माता सुशीला देवी महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित संत सम्मेलन में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए राजमाता आशा भारती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा दिव्य संत थे। उनके द्वारा शुरू किए गए 41 दिवसीय शिव शक्ति महायज्ञ में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का कल्याण अवश्य होता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन गुरूदेव स्वामी कृष्णानन्द महाराज एवं गुरूमाता सुशीला देवी महाराज महान विभूति थे। उनके द्वारा शुरू किए गए सेवा प्रकल्पों के माध्यम से निरंतर समाज के कमजोर वर्गो तथा संत महापुरूषों की सेवा की जा रही है। स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज ने कहा कि संत महापुरूषों के सानिध्य में ही भक्तों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा एवं ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द महाराज व ब्रह्मलीन सुशीला देवी महाराज त्याग एवं तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। उनके द्वारा स्थापित निराला धाम धर्मनगरी में सेवा संस्कृति का प्रमुख केंद्र हैं। महंत प्रह्लाद दास महाराज व महंत रामानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा एवं ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द महाराज व ब्रह्मलीन सुशीला देवी महाराज ने सदैव सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार में अहम योगदान किया। स्वामी नित्यानन्द, स्वामी शिवानन्द व महंत सूरजदास ने कहा कि ब्रह्मलीन निराला स्वामी लहरी बाबा एवं ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द महाराज व ब्रह्मलीन सुशीला देवी महाराज तपस्वी एवं संतत्व के धनी महापुरूष थे। राष्ट्र निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। स्वामी नित्यानन्द ने बताया कि आश्रम में स्थापित की गयी ब्रह्मलीन स्वामी कृष्णानन्द महाराज व ब्रह्मलीन सुशीला देवी महाराज की प्रतिमा सभी को सेवा की प्रेरणा देती रहेगी। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानन्द, स्वामी दिनेशदास, महंत रघुवीर दास, महंत बिहारी शरण, महंत मोहन सिंह, पदम प्रसाद सुवेदी, सुदर्शन शर्मा आदि संत महापुरूष एवं श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक