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स्टार हेल्थ केयरइंश्योरेंस कंपनी को 50लाख रुपए ब्याज के साथ देने का आदेश

 हरिद्वार। एक्सीडेंटल क्लेम की इंश्योरेंस कि पालिसी लिए जाने के बावजूद भी क्लेम ना दिए जाने के मामले में उपभोक्ता आयोग में दायर की गई शिकायत स्वीकार करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को 50 लाख रुपए 6 प्रतिशत ब्याज तथा 20000 वाद व्यय और अधिवक्ता फीस के रूप में देने के आदेश दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम टिकोला कला मंगला निवासी नकलो पत्नी स्वर्गीय कालू ने अपने अधिवक्ता दिनेश वर्मा के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग में स्टार हेल्थ केयर एंड ए लीड इंश्योरेंस कंपनी रुड़की व चेन्नई के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें बताया था कि उसके पुत्र विजेंद्र ने स्टार हेल्थ केयर कंपनी से एक्सीडेंटल क्लेम पॉलिसी ली थी जो कि 50 लाखों रुपए की थी जिस के संबंध में विजेंद्र ने 77सौ रुपए का प्रीमियम भी अदा किया था उक्त पालिसी 4 अक्टूबर 2019 से 3 अक्टूबर 2020 तक वैध थी जिसमें नॉमिनी के रूप में अपनी माता नकलो को नॉमिनी किया था क्योंकि विजेंद्र की शादी नहीं हुई थी और ना ही कोई संतान थी 6 अक्टूबर 2019 को विजेंद्र का एक्सीडेंट हो गया तथा 7 अक्टूबर 2019 को विजेंद्र की एक्सीडेंट में आई चोटों के कारण मृत्यु हो गई थी विजेंद्र का पोस्टमार्टम देहरादून के एमसीसी अस्पताल में हुआ था। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार नकलो ने स्टार हेल्थ केयर के यहां क्लेम के लिए आवेदन किया तथा सारी औपचारिकता पूरी की परंतु इसके बावजूद भी इंश्योरेंस कंपनी ने प्रेम देने से इंकार कर दिया और आवेदन को निरस्त कर दिया जिस के संबंध में नकल होने स्टार हेल्थ केयर के विरुद्ध अपने अधिवक्ता दिनेश वर्मा के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए क्लेम की मांग की थी। इस संबंध में इंश्योरेंस कंपनी की ओर से बताया गया कि शिकायत में सही तथ्य उल्लेखित ने किया है तथा शिकायत गलत आधारों पर दायर की गई है जिस कारण शिकायत निरस्त होने योग्य है जबकि श्रीमती नखरो की ओर से साक्ष्य के रूप में मूल पॉलिसी के साथ अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे जोकि वैध बताते हुए प्लेन की मांग की गई थी। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष कंवर सेन तथा सदस्य विपिन कुमार तथा अंजना चड्ढा ने उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए पाया कि स्टार इंश्योरेंस कंपनी द्वारा क्लेम ना देकर सेवाओं में कमी की गई है तथा श्रीमती नक्लो ने क्लेम ना मिलने पर ई शिकायत दायर की है जिस पर उपभोक्ता आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम देने का आदेश दिया है।


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