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त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे बाबा विश्वनाथ पुरी-श्रीमहंत रविंद्रपुरी

 


हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन बाबा विश्वनाथ पुरी त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। वह सिद्ध संत थे। उनका जीवन सदैव समाज कल्याण को समर्पित रहा। उक्त उद्गार उन्होंने ब्रह्मलीन बाबा विश्वनाथ पुरी की 33वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर व्यक्त किए। उनकी पुण्यतिथि पर रामचरित्र का अखंड पाठ किया गया। इसके उपरांत हवन और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्राचीन हनुमान मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने पर श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज का सिद्धपीठ प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत रविपुरी महाराज ने स्वागत किया। श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन निर्मल जल के समान होता है। ब्रह्मलीन बाबा विश्वनाथ पुरी साक्षात त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र रक्षा और धर्म रक्षा के लिए समर्पित किया। उनका आदर्श पूर्ण जीवन सभी के लिए प्रेरणादायी है। ऐसे महापुरुषों को संत समाज सदैव स्मरण करता रहेगा। कहा कि संतों का जीवन मानव सेवा एवं परोपकार के लिए समर्पित होता है। बाबा विश्वनाथ पुरी एक विद्वान एवं तपस्वी संत थे। महंत रविपुरी महाराज ने बताया कि इस बार कोविड के चलते सूक्ष्म रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गंगा शरण खन्ना एवं सुभाष घई ने कहा कि बाबा विश्वनाथ पुरी ने परंपरांओं का निर्वहन करते हुए समस्त देश में भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म का प्रचार प्रसार किया। राष्ट्र निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। संतों के आशीर्वाद से ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है। इस अवसर पर महंत राम रतनपुरी, राजपुरी, मुख्तियार रघुवन, मधुरवन, अंकित पुरी, अर्जुन पुरी, महेंद्र पुरी, रोशन भारती, शंकर गिरी, संतोष गिरी, गंगा शरण खन्ना, सुभाष घई, पुष्पेंद्र शर्मा, पंडित त्रिलोकी नाथ शर्मा, मुरारी लाल गुप्ता, राहुल पराशर, नवीन, मोहित आदि उपस्थित रहे।


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