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हरीश रावत ने की मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा से मुलाकात

 हरिद्वार। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। हरीश रावत ने कनखल में कृष्णानगर स्थित मेयर अनिता शर्मा के कैंप कार्यालय तक जनसंपर्क किया और लोगों से कांग्रेस को वोट देने की अपील की। मेयर कैंप कार्यालय पहुंचे और मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा से मुलाकात की। बंद कमरे में हुई वार्ता में हरीश रावत ने अशोक शर्मा की नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया। गौरतलब है कि मेयर अनिता शर्मा व अशोक शर्मा भी टिकट के दावेदार थे। परिवर्तन यात्रा की समाप्ति पर हरीश रावत के मेयर अनिता शर्मा के कैंप कार्यालय नहीं पहुंचने पर उनमें नाराजगी थी। जिसे दूर करने के लिए हरीश रावत ने अशोक शर्मा से वार्ता की और उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास किया। मुलाकात के बाद हरीश रावत ने कहा कि हरिद्वार में परिवर्तन अति आवश्यक है। अवैध नशे का कारोबार चरम पर है। युवा नशे की चपेट में हैं। भाजपा जनप्रतिनिधि नशे के कारोबार पर रोक लगाने में नाकाम रहे हैं। भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार देने में भी पूरी तरह विफल रही है।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आने पर घरेलू गैस सिलेंडर 500 रूपए में दिया जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल ब्रह्मचारी, मुरली मनोहर, पार्षद अनुज सिंह, महावीर वशिष्ठ, राजीव भार्गव, सुनील कुमार, नावेज अंसारी, संगम शर्मा, वसीम सलमानी, सुमित भाटिया, राजकुमार ठाकुर, नीतू बिष्ट, ठाकुर रतन सिंह, अमन गर्ग, पुरुषोत्तम शर्मा, दीपाली त्यागी, भुवन महेंद्रू आदि सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। 


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ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक