Skip to main content

चुनाव प्रेक्षकों,पाटी प्रतिनिधियों के समक्ष ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों का द्वितीय रेण्डामाइजेशन

 हरिद्वार। चुनाव प्रेक्षक- के0आर0 मीणा, अरविन्द पाल सिंह सन्धु, एच.पी.एस. सरन, जिला निर्वाचन अधिकारी विनय शंकर पाण्डेय, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ0 योगेन्द्र सिंह रावत तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट सभागार में विधान सभा सामान्य निर्वाचन-2022 के सम्पादनार्थ ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों का द्वितीय रेण्डामाइजेशन किया गया। इसमें बूथवार ई.वी.एम. एवं वी.वी.पैेट का आवंटन किया गया। ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों का द्वितीय रेण्डामाइजेशन करने के पश्चात चुनाव प्रेक्षकों, जिलाधिकारीध्जिला निर्वाचन अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा राजनीतिक दलों की उपस्थिति में विधान सभा क्षेत्रवार आवंटित ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों की सूची का प्रिण्ट आउट निकाला गया तथा उनका अवलोकन किया गया। जिसे प्रेक्षकों एवं जिला निर्वाचन अधिकारी तथा सम्बंधित विधान सभा क्षेत्र के आर.ओ. द्वारा अनुमोदित किया गया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ0 सौरभ गहरवार,उप जिला निर्वाचन अधिकारी पी0एल0 शाह, अपर जिलाधिकारी वीर सिंह बुदियाल(वित्त एवं राजस्व), संयुक्त मजिस्ट्रेट रूड़की अंशुल सिंह, सचिव एचआरडीए उत्तम सिंह चैहान, नगर आयुक्त दयानन्द सरस्वती, उप जिलाधिकारी लक्सर वैभव गुप्ता, उप जिलाधिकारी भगवानपुर बृजेश कुमार तिवारी, सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार सिंह, एसडीएम पूरण सिंह राणा, भूमि अध्याप्ति अधिकारी सुश्री संगीता कनौजिया, उप जिलाधिकारी गोपाल राम विनवाल, मुख्य कृषि अधिकारी नरेन्द्र यादव, एडीआईओ(एनआइसी) यशपाल, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों में से कांग्रेस पार्टी से कमलेश चन्द्र, रमन मेहता, शैलेन्द्र सिंह, शुभम अग्रवाल, भाजपा से गौरव कपिल, अमित कुमार सैनी, जोनी कुमार, जिला मंत्री सीपीआई विजय पाल सिंह, आम आदमी पार्टी से हिमांशु, पीयूष, बसपा से अजय कुमार, सुनील कुमार, भारतीय एकता पार्टी से मो0 आजाद नकी,आजाद समाज पार्टी(कांशीराम) से अंकुश कुमार, यूकेडी से वीर बहादुर राणा, निर्दलीय,प्रतिनिधि-अरूण त्यागी, गजेन्द्र दत्त, संजय उपाध्याय, पंकज कुमार सहित सम्बन्धित अधिकारीगण एवं पदाधिकारीगण उपस्थित थे।


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक