Skip to main content

किडजी प्री स्कूल का छठा वार्षिकोत्सव मनाया


 हरिद्वार। किडजी प्री स्कूल कनखल का छठा वर्षोत्सव डीएसपी प्रशिक्षण, उत्तराखंड पुलिस सुनीता वर्मा के मुखियातिथ्य तथा उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रोफेसर प्रेमचंद शास्त्री की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना, पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में सार्थक ने गीत-हे राम, तू अंतर्यामी सबका स्वामी, जूनियर केजी की बच्ची वन्या ने पल पल भारी मां सीता पर, सीनियर केजी के बच्चे रिया, श्रेयसी, विष्णु, ईशान, नवीन, रुद्रांश आदि ने वंदे मातरम-भोले शंकर आदि समूह गीत मनमोहक एवं भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डीएसपी सुनीता वर्मा ने कहा कि बच्चों के कोरे कागज रूपी मन एवम मष्टिष्क पर जो संस्कार पड़े हैं वे उनके जीवन का आधार हैं। सुनीता वर्मा ने किडजी कनखल के प्रेरक और उत्कृष्ट कार्यक्रमों के लिए बच्चों, स्कूल की प्रिंसिपल प्रियंका शर्मा, सभी टीचर और अविभावकों को बधाई और साधुवाद दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ संस्कार भी जरुरी होते हैं। स्कूल की प्रिंसिपल प्रियंका शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। मीना रावत, दामिनी,रिंकी कुशवाहा,अंकुर कुश,प्रियांश कुमार,सोनिका शर्मा,गौरव सारस्वत,डा.श्रुति,तरुण जोशी,डा.सुरुचि सारस्वत ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया। कार्यक्रम में अर्पित अग्रवाल, शुभम मंडोला एवम अभिषेक अहलूवालिया भी उपस्थित रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक