Skip to main content

बड़े अन्तर से भाजपा प्रत्याशी को हराकर फुरकान अहमद ने लगाई हैट्रिक

 हरिद्वार। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर कांग्रेस का किला माने जाने वाली सीट पिरान कलियर को भेदने में नाकाम रही। कलियर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी फुरकान अहमद ने भाजपा के मुनीश सैनी को 15743 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत की हैट्रिक लगा ली। फुरकान अहमद को 43539 वोट, जबकि मुनीश सैनी को 27796 मत प्राप्त हुए। आजाद समाज पार्टी के अब्दुल वहीद ने भी 11716 मत पाकर दोनों प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर देने का प्रयास किया। कलियर विधानसभा सीट वर्ष 2012 से अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह बहादराबाद सीट का हिस्सा होता था। यह सीट जबसे अस्तित्व में आई है तबसे कांग्रेस के फुरकान अहमद का इस सीट पर कब्जा है। 2012 में फुरकान अहमद ने भाजपा प्रत्याशी श्यामवीर सैनी को हराया। इसके बाद वर्ष 2017 में फुरकान अहमद ने भाजपा प्रत्याशी जयभगवान सैनी को करीब ढाई हजार वोट से हराकर सीट बचाई थी। इस बार फुरकान अहमद को रामपुर गांव के ही आजाद समाज पार्टी प्रत्याशी अब्दुल वहीद उर्फ भूरा से चुनौती मिलने के कयास थे, लेकिन फुरकान अहमद ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा दी। भाजपा प्रत्याशी मुनीश सैनी पिछले प्रत्याशियों के मुकाबले चुनाव में कहीं भी ठहरते नहीं दिखे। इसकी दूसरी वजह यह रही कि बसपा और भाजपा प्रत्याशी एक ही बिरादरी के थे, जिसकी वजह से वोटों का बिखराव हुआ। फुरकान अहमद की जीत की हैट्रिक से उनके गांव रामपुर से लेकर कलियर तक जश्न का माहौल है। जीत के बाद फुरकान अहमद ने कहा कि यह जीत जनता की जीत है। दस साल से वह कलियर विधानसभा के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। बिना किसी भेदभाव के क्षेत्र का विकास किया है। विकास की बदौलत ही जनता ने उन्हें वोट दिया है। जो काम अधूरे रह गए हैं, उनको इस बार पूरा किया जाएगा। क्षेत्र की जनता, समर्थक, कार्यकत्र्ता और पार्टी हाईकमान के अथक प्रयास से जीत मिली है। जनता ने जो उम्मीद जताई है उन पर खरा उतरूंगा।


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक