Skip to main content

परम कल्याणकारी है श्रीमदभागवत कथा-पंडित अधीर कौशिक

 


हरिद्वार। श्री परशुराम घाट न्यास समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान कृष्ण जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसके पूर्व श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने संतो व श्रद्धालुओं के साथ व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। इस अवसर पर पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि परम् कल्याणकारी श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का अवसर सौभाग्य से प्राप्त होता है। श्रीमदभावगत कथा के श्रवण मात्र से ही भक्तों का कल्याण हो जाता है। परिवारों में सुख समृद्धि का वास होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का भण्डार है। गंगा तट पर श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण करने से और अधिक पुण्य लाभ भक्तों को प्राप्त होता है। बाबा हठयोगी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति एवं सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में अधिक से अधिक समय लगाएं। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। जन्म जन्मांतर के पाप से मुक्ति पानी है तो कथा का श्रवण अवश्य करें। बाबा हठयोगी ने युवाओं से भी आह्वान किया कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करे। अपनी संस्कृति की और अग्रसर हों। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य अनूप शास्त्री ने श्रद्धालु भक्तों को भगवान कृष्ण जन्मोत्सव की कथा का श्रवण कराया। इस दौरान स्वामी सत्यानन्द महाराज, स्वामी विनोद महाराज, पंडित रविकांत शर्मा, योगी रजनीश,पंडित पवन कृष्ण शास्त्री,राजेंद्र पाराशर, अमित कौशिक, अमित शर्मा,एपी शर्मा, केसी शर्मा, डा.आरडी शर्मा, नवीन वैष्णव, मुकेश जोशी आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक