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स्वामी पं. शंभूदेव जी का समूचा जीवन संस्कृत व संस्कृति के संवर्द्धन को समर्पित रहा


 हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री जगदीश आश्रम में संस्था के परमाध्यक्ष महंत स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री के संयोजन में ब्रह्मलीन स्वामी पं. शंभूदेव जी महाराज की 47वीं पुण्यतिथि श्रद्धाभाव के साथ आयोजित की गयी। तीन दिवसीय गुरुजन स्मृति समारोह की अध्यक्षता म.मं. स्वामी अनन्तानंद महाराज ने की। इस अवसर पर आचार्य गरीब दास जी की अखण्ड वाणी का पाठ व संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। संत सम्मेलन में संत समाज ने स्वामी शंभू देव महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जगदीश आश्रम के वर्तमान महंत स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट की। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में म.मं. स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि स्वामी पं. शंभूदेव जी महाराज का समूचा जीवन संस्कृत व संस्कृति के संवर्द्धन को समर्पित रहा। स्वामी पं. शंभूदेव जी महाराज की स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु उनके शिष्य ब्रह्मलीन स्वामी शांतानंद जी महाराज ने उनकी स्मृति में स्वामी शम्भुदेव संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की। स्वामी शंभू देव जी महाराज संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान थे। उन्होंने संस्कृत के प्रचार-प्रसार में जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय रहेगा। स्वामी रविदेव शास्त्री महाराज ने कहा कि अपने गुरुजनों की परम्परा पर चलते हुए स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री निरन्तर धार्मिक, सामाजिक गतिविधियों व सेवा प्रकल्पों का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने अपनी कुशल कार्यशैली से संस्था को ऊंचाईयों तक पहुंचाने का कार्य किया है। इस अवसर पर नगर निगम में भाजपा पार्षद दल के उपनेता अनिरूद्ध भाटी ने कहा कि श्री जगदीश आश्रम की धार्मिक परंपराओं व समाजहित के कार्य को आगे बढ़ाने का काम स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री महाराज निरन्तर कर रहे हैं। गुरुजन स्मृति समारोह में आए हुए श्रद्धालु भक्तों,संत समाज का स्वागत करते हुए जगदीश आश्रम के वर्तमान गद्दी नशीन महंत स्वामी योगेन्द्रानन्द शास्त्री महाराज ने कहा कि गुरुदेव ने अपने जीवन काल में धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार में जो कार्य किया है वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रकाश स्तंभ बनकर उनका मार्गदर्शन करेगी। कहा कि सद्गुरुदेव स्वामी शांतानंद शास्त्री के जीवन काल में संस्था ने उत्तरोत्तर वृद्धि की है। मीरा चेतन आतिथेयम्, श्री स्वामी शंभु देव संस्कृत महाविद्यालय सहित हरियाणा, पंजाब में अनेकों संस्थाएं स्थापित की गई, जो धर्म सेवा का कार्य कर रही है। अपने गुरुजनों द्वारा स्थापित उच्च परम्पराओं का वह सदैव निर्वाह करेंगे। इस अवसर पर म.मं.हरिबल्लीदास शास्त्री,स्वामी चिदविलासानन्द सरस्वती,स्वामी शिवशंकर गिरि,म.मं.प्रेमानंद,महंत जमुनादास,स्वामी आनंद स्वरूप शास्त्री,महंत रविदेव शास्त्री,महंतदिनेशदास,महंतसूरजदास,महंतसुतीक्ष्णमुनि,स्वामी हितेश्वरानंद, स्वामी केशवानन्द, स्वामी विवेकानन्द,संतहिमांशु,स्वामीओमानन्द,पार्षदविनित जौली,संजय वर्मा,राहुल बंसल,दिव्यम यादव,गोपी सैनी समेत ट्रस्टीगणन व देश भर से आये हुए श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।


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