Skip to main content

भेल श्रमिक यूनियनों के मान्यता चुनाव 9जुलाई को

 


हरिद्वार। हेवी इलेक्ट्रिकल्स वर्कर्स ट्रेड यूनियन, सीएफएफपी श्रमिक यूनियन एवं सीएफएफपी वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारीयों एवं सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सेक्टर वन स्थित कार्यालय पर भेल श्रमिक यूनियनों के मान्यता चुनाव को लेकर बैठक की। बैठक को संबोधित करते हुए हेवी इलेक्ट्रिकल वर्कर्स ट्रेड यूनियन के महामंत्री विकास सिंह ने कहा कि यूनियन दो वर्षों  से यूनियन के मान्यता के चुनाव कराने के लिए धरना प्रदर्शन के माध्यम से संघर्षरत थी। यूनियन के प्रयासों और दबाव के चलते भेल प्रबंधन ने 9 जुलाई को चुनाव कराने की घोषणा की है। यह यूनियन के कार्यकर्ताओं की जीत है। विकास सिंह ने कहा की पिछले 6 सालों में जिन यूनियनों ने मान्यता होते हुए भेल मजदूरों के हितों के लिए काम नहीं कियाऐसी यूनियनों को भेल मजदूरों को सबक सिखाना चाहिए। यूनियन के कार्यवाहक अध्यक्ष रवि कश्यप ने कहा कि जिस प्रकार प्रबंधन ने यूनियन के मान्यता के चुनाव की घोषणा की है उसी प्रकार समुदायिक केंद्र के चुनावों की भी घोषणा भी स्थानीय प्रबंधन जल्द से जल्द करें। सीएफएफपी श्रमिक यूनियन के महामंत्री अमित गोगना ने कहा कि वेज रिवीजन के समय 2009 में भर्ती मजदूरों को जिन्हें मान्यता प्राप्त यूनियनों ने विश्वास दिलाया था कि यदि वेज रिवीजन में ढाई इंक्रीमेंट की मांग नहीं मानी गई तो वेज रिवीजन पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। परंतु भेल हरिद्वार की नम्बर 1 व 2 मान्यता प्राप्त यूनियनो ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया। ऐसी यूनियनों को सबक सिखाने का समय आ गया है। बेठक में सम्मिलित होने वाले में जय शंकर सिंह, बलबीर सिंह रावत,राकेश मालवीय,नवीन गिरी, मोहित शर्मा,अशोक कुमार सिंह,अरविंद मावी, नवीन कुमार,विकास सैनी,अरविंद कुण्डु,कामता प्रसाद,हरिद्वारी यादव, बबलू गोड,नवीन कुमार, अरविंद कुमार,प्रहलाद चैहान,संदीप जोशी,वीरेंद्र सिंह भदोरिया,मणी प्रकाश तिवारी,राजबीर सिंह, वाजिद अली,अजय, अरूण भट्ट,धर्मेश गुप्ता,बीएन यादव,गोविन्द सिंह रावत, विपिन सैनी, बिरेंद्र नेगी सहित सैकड़ों सदस्य शामिल रहे। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक