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ऋषि परंपरा के वाहक थे भगवान परशुराम-श्रीमहंत ज्ञानदास

 हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज ने कहा है कि भगवान परशुराम भारत की ऋषि परंपरा के महान वाहक थे। उनका शस्त्र और शास्त्र दोनों पर समान अधिकार था और उनका जीवन हमेशा ही आदर्श पूर्ण रहेगा। बैरागी कैंप स्थित श्री परशुराम ब्राह्मण धर्मशाला में भगवान परशुराम जन्मोत्सव संत समाज के सानिध्य में धूमधाम के साथ मनाया गया। जिस में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए पूर्व अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज ने कहा कि भारत के इतिहास में अनेक ब्राह्मणों ने जन्म लेकर देश को उन्नति की ओर अग्रसर किया। भगवान परशुराम ने अपनी प्रतिभा और दैवीय गुणों से परिपूर्ण जीवन में अपनी अद्भुत शस्त्र विद्या से कई समकालीन गुणवान शिष्यों को युद्ध कला में पारंगत किया। उनका जीवन समस्त ब्राह्मण समाज को गौरवान्वित करता है। वर्तमान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम माता पिता की भक्ति और आदर को सर्वोच्च मानते थे। वह तपस्वी और तेजस्वी थे, जो अपने साधकों और भक्तों को आज भी दर्शन देते हैं। भगवान परशुराम की साधना करने से धन-धान्य और ज्ञान का अर्जन करने वाला हर प्रकार से संपन्न और साहसी होता है। संत समाज शास्त्र के साथ-साथ शस्त्र विद्या मेें भी परिपूर्ण होता है और जब जब सनातन धर्म पर कुठाराघात हुआ है। संत समाज ने आगे आकर धर्म के संरक्षण संवर्धन के लिए कार्य किया है। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद एवं स्वामी ऋषिश्वरानंद महाराज ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में ब्राह्मण समाज का अहम योगदान है। ब्राह्मणों ने सदैव ही अपने तप और विद्वत्ता के माध्यम से देश का मान बढ़ाया है और धर्म एवं संस्कृति का प्रचार प्रसार कर सदैव समाज को उन्नति की ओर अग्रसर किया है। श्री ज्ञान गंगा गौशाला के अध्यक्ष महंत रामदास महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम के जीवन से हमें गुरु शिष्य परंपरा का महत्व समझना चाहिए। भगवान परशुराम ने ना केवल अपने शिष्यों का संरक्षण किया। बल्कि उन्हें अपनी अद्भुत विद्या द्वारा विभिन्न प्रकार की अस्त्र शिक्षा देकर उन्हें जीवन रक्षा की भी प्रेरणा दी। उन्हें अत्यंत खुशी है कि उनके पूज्य गुरुदेव श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज 12 वर्षों के बाद हरिद्वार पधारे और इतने संतो के बीच उनको सभी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव ही अपने भक्तों को ज्ञान की प्रेरणा देकर उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। सभी को संतो के आदर्श पूर्ण जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का परशुराम ब्राह्मण धर्मशाला समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा ने फूल माला पहनाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। बाबा हठयोगी, महंत जनार्दन दास, महंत प्रहलाद दास व महंत जगदीश दास ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के कृपापात्र शिष्य महंत संजय दास,महंत हेमंत दास,स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती,बाबा हठयोगी,महंत दुर्गादास,महंत प्रेमदास,महंत सूरज दास,महंत प्रह्लाद दास, महंत अरुण दास,महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वरानंद गिरी,स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी हरिहरानंद, श्रीमहंत विष्णु दास,महंत रघुवीर दास,महंत गोविंद दास,महंत बिहारी शरण,महंत अंकित शरण,महंत अगस्त दास,महंत अंकित दास,भाजपा नेता ओंकार जैन,डा.धर्मपाल सहित कई संत महापुरुष उपस्थित रहे।


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