Skip to main content

चारधाम यात्रा को लेकर दुष्प्रचार कर श्रद्धालुओं को भ्रमित न करें-श्रीमहंत रविंद्रपुरी

 


हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा है कि चारधाम यात्रा को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। कुछ लोग लोग यात्रा को लेकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चारधाम यात्रा को लेकर युद्धस्तर पर यात्री श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान करने में हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देवभूमि से विशेष लगाव रखते हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा देश दुनिया में सनातन संस्कृति एवं धर्म की पताका को फहराने का सशक्त माध्यम है। विदेशी नागरिक भी भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को लेकर राजनैतिक बयानबाजी नहीं की जानी चाहिए। कुछ लोग चारधाम यात्रा को लेकर गलत बयानबाजी कर रहे हैं। यह यात्रा पूरी तरह से धार्मिक यात्रा है। किसी की भी भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। देश दुनिया से श्रद्धालु भक्त चारधाम यात्रा के लिए पहुंचते हैं। लेकिन कुछ लोग सुनियोजित तरीके से चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों से सचेत होने की बात कही और कहा कि अगर बयानबाजी ही करनी है तो काशी, मथुरा को लेकर अपने विचार रखें। चारधाम यात्रा धर्म संस्कृति की पहचान है। यात्रा को सकुशल संपन्न कराने में सभी को सहयोग करना होगा। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्करसिंह धामी चारधाम यात्रा को लेकर सजगता से काम कर रहे हैं। उनके द्वारा श्रद्धालु यात्रीयों को भरपूर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने यह भी जानकारी दी कि उनके द्वारा अखाड़े के प्रतिनिधियों को चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की जानकारी के लिए श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी से भेजे गए प्रतिनिधियों ने चारधाम यात्रा की व्यवस्थओं को परखा। उनके द्वारा भी यात्रा में किसी प्रकार की कोई दिक्कत परेशानी ना होने की बात को बताया गया है। लगातार धर्मनगरी के संत महापुरूष भी चारधाम यात्रा में पहुंच रहे हैं।  मां मनसा देवी एवं मां गंगा के आशीर्वाद से चारधाम यात्रा सकुशल संपन्न होगी। 


Comments

Popular posts from this blog

ऋषिकेश मेयर सहित तीन नेताओं को पार्टी ने थमाया नोटिस

 हरिद्वार। भाजपा की ओर से ऋषिकेश मेयर,मण्डल अध्यक्ष सहित तीन नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के अन्दर नोटिस का जबाव मांगा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में ऋषिकेश की मेयर श्रीमती अनिता ममगाईं, ऋषिकेश के मंडल अध्यक्ष दिनेश सती और पौड़ी के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश रावत को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनबीर सिंह चैहान के अनुसार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार ने नोटिस जारी किए हैं। नोटिस में सभी को एक सप्ताह के भीतर अपना स्पष्टीकरण लिखित रूप से प्रदेश अध्यक्ष अथवा महामंत्री को देने को कहा गया है।

अयोध्या,मथुरा,वृंदावन मे भी बनेगा महाजन भवन,नरेश महाजन बने उपाध्यक्ष

  हरिद्वार। उतरी हरिद्वार स्थित महाजन भवन मे आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा के सदस्यों ने महाजन भवन मे महाजन बिरादरी में से पठानकोट की मुकेरियां विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुने गये विधायक जंगीलाल महाजन का जोरदार स्वागत किया। बताते चले कि जंगी लाल महाजन हरिद्वार महाजन भवन के चेयरमैन, तथा आल इंडिया महाजन शिरोमणी सभा के प्रैसिडेट पद पर भी महाजन बिरादरी की सेवा कर रहें हैं। इस अबसर पर अखिल भारतीय महाजन सभा के चेयरमैन व (पठानकोट) से भाजपा विधायक जंगीलाल महाजन ने कहा कि आल इंडिया महाजन सभा की पद्धति के अनुसार नरेश महाजन जो कि आल इंडिया सभा के सीनियर बाईस चेयरमैन भी है को हरिद्वार महाजन भवन में उपाध्यक्ष तथा हरीश महाजन को महामंत्री निुयुक्त किया। इस अबसर पर जंगी लाल महाजन ने कहा कि हम आशा ये दोनों मिलकर समितिया भी बनायेगे और अन्य सभाओं को जोडकर हरिद्वार महाजन भवन की उन्नति के लिए जो हमारे बुजुर्गों ने जो विरासत हमे दी है उसे आगे बढायेगे। हम चाहते हैं हरिद्वार महाजन भवन की तरह ही मथुरा,बृदांवन तथा अयोध्या मे भी भवन बने। उसके लिए ये दोनों अपना योगदान देगे। इसीलिए

आंदोलनकारियों की शहादत का परिणाम है उत्तराखंड राज्य--डॉ० अंजान

  हरिद्वार। 2 अक्टूबर का दिन पूरे देश में अहिंसा और शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। और उत्तराखंड तो स्वयं शांति, समन्वय, समरसता एवं अहिंसा का द्योतक ही रहा है। उत्तराखंड राज्य के इतिहास के बारे में डॉक्टर हरिनारायण जोशी ने बताया कि आज के ही दिन 2 अक्टूबर 1994 में शांति और अहिंसा का अर्थ ही बदल गया। क्रुरता, हिंसा और अमानवीयता की सारी सीमाएं पार हो गईं। शांति के साथ राज्य प्राप्ति की मांग मनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न भागों से अपनी राजधानी दिल्ली जाते हुए निहत्थे आंदोलनकारी थे बस यही कसूर था उनका कि उत्तराखंड राज्य की मांग।और यूपी सरकार की ऐसी व्यवस्था थी कि जिसने सुरक्षा देनी थी, महिलाओं को ही नहीं, पुरुषों को भी वही भक्षक के रूप में क्रुरतम हिंसा और अमानवियता की पराकाष्ठाओं को हिंसात्मक रूप देने में सम्मिलित हो गये। उस समय सरकार की मानवीयता छलनी हो गई। रामपुर तिराहे के लहराते खेत और वहां की संपूर्ण प्रकृति असहाय महिला और पुरुषों की कराहों के साथ चित्कार कर उठी होगी। लेकिन तथाकथित रक्षकों पर प्रभाव नहीं पड़ा। उनकी संवेदनाएं और मानवतायें भस्म हो गई और वे दैत्य स्वरूप के संवाहक