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पृथ्वीराज चैहान भारतीय इतिहास मे एक बहुत ही अविस्मरणीय नाम

 हरिद्वार। क्षत्रिय समाज द्वारा पृथ्वीराज चैहान की जयंती आर्य नगर चैक ज्वालापुर में दीप प्रज्वलन कर धूमधाम से मनाई गई। सभी ने पृथ्वीराज चैहान पाठ को समर्पित किए तथा दीपक जला कर उनका जन्मदिन मनाया। राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर मधुसूदन अग्रवाल ने मुख्य अतिथि बतौर कहा कि पृथ्वीराज चैहान एक वीर योद्धा, विद्यानुरागी और साहित्यकारों का आश्रयदाता था। उसके दरबार में चन्दबरदाई तथा जगनिक जैसे कवि स्थान पाते थे। उन्होंने अपने रचित ग्रन्थों पृथ्वीराज रासो तथा पृथ्वीराज विजय में अपने आश्रयदाता पृथ्वीराज चैहान की वीरतापूर्ण गाथाओं का अत्यन्त आलंकारिक, चमत्कारपूर्ण एवं अतिशयोक्तिपूर्ण अपनी कृतज्ञता ही प्रकट की है। पृथ्वीराज चैहान को इतिहासकार सेनानायक तो मानते हैं, किन्तु उसमें राजनीतिक दूरदर्शिता एवं कूटनीति का सर्वथा अभाव था। उसने मुहम्मद गोरी के साथ रक्षात्मक युद्ध लड़ा। तराइन के युद्ध में मुहम्मद गोरी के बुरी तरह घायल होने पर बजाय बख्शने के उसे बन्दी बनाकर दण्ड देना था। उसकी सबसे बड़ी भूल यह थी कि उसने पड़ोसी राज्यों से अपने सम्बन्ध खराब रखे। भारतीय शासकों को विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध संगठित नहीं कर पाया। राज्य की सीमा की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया। तराइन के द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गोरी से सन्धि-वार्ता में लगा रहा। उसकी कूटनीतिक चाल को समझने की दृष्टि यदि उसमें होती, तो उसकी सेना अचानक हुए आक्रमण से इस तरह छिन्न-भिन्न होकर पराजित नहीं होती, किन्तु आगे आने वाले शासकों के लिए यह एक सबक हो सकता है। क्षत्रिय समाज के महामंत्री हनी सिंह शेखावत ने कहा कि पृथ्वीराज चैहान भारतीय इतिहास मे एक बहुत ही अविस्मरणीय नाम है। हिंदुत्व के योद्धा कहे जाने वाले चैहान वंश मे जन्मे पृथ्वीराज आखिरी हिन्दू शासक भी थे। महज 11 वर्ष की उम्र मे, उन्होने अपने पिता की मृत्यु के पश्चात दिल्ली और अजमेर का शासन संभाला और उसे कई सीमाओ तक फैलाया भी था, परंतु अंत मे वे विश्वासघात के शिकार हुये और अपनी रियासत हार बैठे, परंतु उनकी हार के बाद कोई हिन्दू शासक उनकी कमी पूरी नहीं कर पाया। पृथ्वीराज को राय पिथोरा भी कहा जाता था। पृथ्वीराज चैहान बचपन से ही एक कुशल योध्दा थे, उन्होने युध्द के अनेक गुण सीखे थे वरिष्ठ भाजपा नेत्री कुसुम गांधी ने कहा कि सम्राट पृथ्वीराज चैहान का जन्म एक जून 1149 को गुजरात में हुआ था। जो भारत वर्ष के आखिरी हिदू शासक रहे। 11 वर्ष की उम्र में पिता के देहांत के बाद दिल्ली और अजमेर के शासक बने। इनके पिता का नाम सोमेश्वर, माता का नाम कर्पूर देवी तथा गुरु रामजी थे। बचपन से इन्होंने शस्त्र और शास्त्र दोनों विद्या में अपनी निपुणता हासिल की। इनके वीरता की कहानी दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी। राजकुमार अरोड़ा मंडल अध्यक्ष ने कहा कि सम्राट पृथ्वीराज चैहान भारत वर्ष के महान सम्राट थे, वो शब्दभेदी बाण चलाने में निपुण थे। उन्होंने विदेशी आक्रमण कारियों को युद्धभूमि में अनेकों बार परास्त किया। आज के युवाओं को सम्राट पृथ्वीराज चैहान का अनुसरण करना चाहिए, और देश के लिए सबकुछ बलिदान करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। कार्यक्रम का का संचालन हरि सिंह शेखावत महामंत्री क्षत्रिय समाज ने किया। कार्यक्रम में गोविंद सिंह बिष्ट,राजेंद्र सिंह,जयपाल सिंह महिला मंडल महामंत्री ममता चैहान,सुषमा चैहान,सागर सिंह चैहान,शिव कुमार शर्मा एडवोकेट आईपीएस तोमर राम सिंह चैहान,सत्यपाल धीमान चैधरी चरण सिंह आदि उपस्थित थे।


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