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संत समाज के प्ररेणा स्रोत थे ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

 हरिद्वार। ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज का पच्चीसवां रजत निर्वाण महोत्सव कनखल स्थित श्री महर्षि ब्रह्महरि उदासीन आश्रम में संत महापुरूषों के सानिध्य में समारोह पूर्वक मनाया गया। श्रीमहंत महेश्वरदास महाराज की अध्यक्षता में आयोजित निर्वाण महोत्सव में सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों ने ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हे महान संत बताया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज दिव्य महापुरूष और संत समाज के प्रेरणा स्रोत थे। जिनका पूरा जीवन संत समाज की सेवा और श्रद्धालु भक्तों के कल्याण को समर्पित रहा। उनके बताए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव ंिसंह महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज त्याग एवं तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति थे। समाज के जरूरतमंदों व गरीब असहायों के उत्थान में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। श्रीमहंत महेश्वरदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गुरू शिष्य परंपरा ही भारत को महान बनाती है। महंत दामोदर शरण दास महाराज अपने गुरूदेव ब्रहम्लीन महंत ब्रह्महरि महाराज द्वार स्थापित सेवा परंपरा को जिस प्रकार आगे बढ़ा रहे हैं। उससे युवा संतों को प्रेरणा लेनी चाहिए। पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि संतों के तप बल से भारत विश्व गुरू की पदवी पर आसीन होगा। ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि उदासीन महाराज के कृतित्व से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। कोठारी महंत जसविन्दर सिंह महाराज व महंत दामोदर दास महाराज ने ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने के लिए हमेशा अनूठे प्रयास किए। महामण्डलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद एवं महामण्डलेश्वर स्वामी कपिल मुनि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत ब्रह्महरि महाराज एक विद्वान एवं तपस्वी संत थे। जिन्होंने समाज के गरीब असहाय वर्ग की मदद करने के साथ सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में हमेशा योगदान दिया। महंत दिव्यांबर मुनि एवं स्वामी भगवत स्वरूप महाराज ने कहा कि संत महापुरूष केवल शरीर त्यागते हैं। उनकी आत्मा भक्तों एवं समाज के कल्याण के लिए सदैव उपस्थित रहती है। आश्रम के महंत दामोदर शरण दास महाराज ने समारोह में आए सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन ब्रह्महरि महाराज सहज व सरल स्वभाव के मृदुभाषी संत थे। वह सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें गुरू के रूप में उनका सानिध्य प्राप्त हुआ। संत समाज के आशीर्वाद से गुरूदेव द्वारा स्थापित सेवा परंपरा को आगे बढ़ाना ही उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य है। श्रद्धांजलि देने वालों में स्वामी भगवतस्वरूप,स्वामी शांतानंद, महंत गोविंददास, महंत राजेंद्रदास,स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी श्रवण मुनि,महंत जयेंद्र मुनि,महंत राममुनि,महंत प्रेमदास, महंत संतोषानंद,महंत दिनेश दास,महंत रघुवीर दास,महंत बिहारी शरण,महंत सूरज दास, महंत दुर्गादास,महंत प्रह्लाद दास,महंत रामानंद सरस्वती,स्वामी कृष्णानंद,स्वामी विनोद महाराज, महंत शिवानंद सहित बड़ी संख्या में संत व श्रद्धालु भक्त शामिल रहे। 


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