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गुरू अमरदास महाराज ने समाज को कुरीतियों से मुक्ति का मार्ग दिखाया-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

 


हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा है कि भारत के इतिहास में गुरुओं का सर्वोच्च स्थान है। उसी परंपरा के महान गुरु अमरदास महाराज एक युगपुरुष थे। जिन्होंने मध्यकालीन भारतीय समाज सामंतवादी होने के कारण जिसमें अनेक सामाजिक बुराइयां व्याप्त थी और समाज के स्वस्थ विकास में अवरोध बनकर खड़ी थी। ऐसे कठिन समय में गुरु अमरदास महाराज ने इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक प्रभावशाली आंदोलन चलाया और समाज को कुरीतियों से मुक्त कर सही मार्ग दिखाया। कनखल स्थित तपस्थली गुरु अमरदास महाराज डेरा बाबा दरगाह सिंह गुरुद्वारा तीजी पातशाही में सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों के सानिध्य में आयोजित गुरु अमर दास महाराज के ज्योति ज्योत समागम एवं ब्रह्मलीन महंत जसविंदर महाराज की 24वीं पुण्यतिथी पर आयोजित गुरुजन स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि जाति प्रथा एवं ऊंच-नीच को समाप्त करने के लिए गुरु अमरदास महाराज ने लंगर प्रथा को और सशक्त किया जो आज भी समाज में समरसता का वातावरण बनाती है। ऐसे महान महापुरुष समाज के लिए वरदान हैं। संत समाज उनको सदैव नमन करता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत जसविंदर सिंह महाराज त्याग एवं तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिए समर्पित किया। महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज ने कहा कि समाज से भेदभाव को खत्म करने के प्रयासों में गुरु अमरदास महाराज का बड़ा योगदान है। उन्होंने सती प्रथा जैसी घिनौनी रस्म को स्त्री के अस्तित्व का विरोधी मानकर उसका जबरदस्त विरोध किया। ताकि महिलाएं सती प्रथा से मुक्ति पा सके और समाज में उनके व्यक्तित्व का निर्माण हो। कोठारी महंत जसविंदर सिंह एवं पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि देश को उन्नति की ओर अग्रसर करने में महापुरुषों का अहम योगदान रहा है। गुरु अमरदास महाराज एक अवतारी महापुरुष थे और सिख पंथ के एक महान प्रचारक थे। जिन्होंने गुरु नानक महाराज के जीवन दर्शन को एवं उनके द्वारा स्थापित धार्मिक विचारधारा को आगे बढ़ाया और स्वयं एक आदर्श बनकर सामाजिक सद्भाव की मिसाल कायम की। महंत रंजन सिंह ने कहा कि गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप है। गुरू शब्द के उच्चारण से ही शिष्य का जीवन बदल जाता है। उन्होंने कहा कि गुरूजनों के अधूरे कार्यो को पूरा करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। गुरुद्वारा तीजी पातशाही की प्रबंधिका बीबी बिनिंदर कौर सोढ़ी ने कहा कि गुरु अंधकार में भटकती मानवता को ज्ञान प्रदान करते हैं। भारतीय भूमि के कण-कण में सेवाभाव परोपकार के भाव समाहित है और भारत की भूमि गुरुओं की भूमि है। यदि हम महापुरुषों के जीवन पर दृष्टिपात करें तो पाएंगे कि हमारे सभी महापुरुष परोपकार के भावों से परिपूर्ण थे। परंतु गुरु अमरदास महाराज भक्ति त्याग सेवा के पुंज समाज सेवा व सुधारकर्ता और समाज से जाती पाती के कलंक का उन्मूलन करने का संकल्प धारण करने वाले महापुरुष थे। जिन्होंने समाज को एक नई दिशा प्रदान की हमें उनके आदर्शो को अपनाकर राष्ट्र को उन्नति की ओर अग्रसर करने में अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए। कार्यक्रम में पधारे सभी संत महापुरुषों का महंत रंजय सिंह महाराज एवं समाजसेवी अतुल शर्मा ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीमहंत रविन्द्रपुरी,महंत जसविंदर सिंह,महंत अमनदीप सिंह, स्वामी हरिचेतनानंद, सतपाल ब्रह्मचारी, स्वामी ऋषिश्वरानंद,बाबा बलराम दास हठयोगी,महंत दुर्गादास,स्वामी चिदविलासानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत विनोद महाराज,महंत रघुवीर दास, महंत विष्णुदास, महंत बिहारी शरण, महंत सूरज दास, महंत प्रेमदास,महंत सूर्यमोहन गिरी,विधायक रवि बहादुर, अतुल शर्मा, संजय पालीवाल, सुनील अग्रवाल,प्रदीप चौधरी, अनिरूद्ध भाटी, नीरव साहू, रोहित साहू,अशोक शर्मा,अजय मगन,हरीश शेरी सहित कई संत महापुरूष व गणमान्य लोग मौजूद रहे। 


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