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रानी लक्ष्मीबाई द्वारा किया गया संघर्ष हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है

 हरिद्वार। राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति ट्रस्ट द्वारा रानी लक्ष्मी बाई की जयंती पर वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया। वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता इं0मधुसूदन अग्रवाल व संचालन राष्ट्रीय मंत्री जितेन्द्र कुमार शर्मा ने किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष इं0मधुसूदन अग्रवाल ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय वीरांगना थी, उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी,रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 में काशी नगरी में एक मराठा ब्राह्मण परिवार में हुआ था, रानी लक्ष्मीबाई के पिता जी का नाम मोरोपंत तांबे और माता का नाम भागीरथी बाई था। रानी लक्ष्मीबाई का असली नाम मणिकर्णिका था और सभी उन्हें मनु कहकर पुकारते थे,रानी लक्ष्मी बाई की माता धर्म और संस्कृति परागण भारतीयता की साक्षात मूर्ति थी,उन्होंने बचपन में मनु बाई को विभिन्न प्रकार के धार्मिक,सांस्कृतिक और शौर्यपूर्ण गाथाएं सुनाई थी,इससे मनु का मन और हृदय विविध प्रकार के उच्च और महान उज्जवल गुणों से परिपूर्ण होता गया। प्रान्तीय उपाध्यक्ष उत्तराखंड पश्चिम की रेखा नेगी ने कहा कि रानी लक्ष्मी बाई भारत की ऐसी हो जाती है जिन्होंने अपने संघर्ष और तपोबल से अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ी और वीरगति को प्राप्त हुई थी। उनके द्वारा किया गया संघर्ष हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है और भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान अतुलनीय है। इतिहास के पन्नों उनका नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित किया गया है राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (महिला विंग) शोभा शर्मा ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने इस बात को साबित किया कि महिलाएं किसी भी मोर्चे पर कमजोर और निर्मल नहीं आया वक्त आने पर महिलाएं मां चंडी और काली का रूप भी ले सकती है। राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष डा0 सपना बंसल ने कहा कि भारत की वीर नारियों में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है। देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाली लक्ष्मीबाई पर भारत माता को गर्व है। भारत के इतिहास में ऐसी वीरांगना का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है।राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सुरेश चन्द्र गुप्ता ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने कठिन संघर्षों का सामना करते हुए हमारे देश को आजाद कराने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाया रानी लक्ष्मीबाई एक साहसी, बुद्धिमती और वीरांगना सेना थी,उन्होंने अपने प्राणों की चिंता ना करते हुए हमारे देश के आजादी के लिए प्राण न्योछावर कर दिया। वेबीनार में जगदीश लाल पाहवा,मीडिया प्रभारी हेमन्त सिंह नेगी,डा0पंकज कौशिक,कुलभूषण शर्मा,एस0एस0त्यागी,विनोद मित्तल,कमला जोशी,राजीव राय,नानकचन्द्र गोयल ,अशोक कुमार गुप्ता,विमल कुमार गर्ग,राकेश अरोड़ा,भारती सिंह,धनप्रकाश गोयल, रोहित, जगदीश बावला,इं0 रूचिर कुमार, डा0 शिवि अग्रवाल, अंकुर गोयल, अर्चना सिंघल, ऊषा शर्मा, दिशी गर्ग, अश्वनी सिंह उपस्थित रहे।


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