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संत समाज के प्ररेणा स्रोत थे ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती-श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

 


हरिद्वार। ब्र्ह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती महाराज की पुण्यतिथी पर उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए संत समाज ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। भारतमाता पुरम स्थित गोपाल आश्रम के परमाध्यक्ष महंत रामानंद सरस्वती महाराज के संयोजन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज के प्रेरणा स्रोत और त्याग व तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती महाराज ने अपना पूरा जीवन समाज को ज्ञान की प्रेरणा देकर सद्मार्ग पर अग्रसर करने में व्यतीत किया। परम तपस्वी ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द महाराज का जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा। सभी को उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र कल्याण व मानव सेवा में योगदान करने का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए महंत रामानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि वे सौभाग्यशाली है कि उन्हें गुरू के रूप में ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती महाराज दिव्य संत थे। धर्म शास्त्रों का उनका ज्ञान विलक्षण था। गुरूदेव से प्राप्त शिक्षाओं व ज्ञान का अनुसरण करते हुए आश्रम के सेवा प्रकल्पों में वृद्धि करने के साथ वे संत सेवा व मानव कल्याण में योगदान कर रहे हैं। महंत देवानंद सरस्वती महाराज एवं महंत निर्मलदास महाराज ने कहा कि योग्य गुरू को ही सुयोग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। महंत रामानंद सरस्वती महाराज अपने गुरूदेव ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द महाराज के पदचिन्हों पर चलते हुए जिस प्रकार सनातन धर्म के प्रचार प्रसार व सेवा कार्यो में योगदान कर रहे है। उससे युवा संतों को प्रेरणा लेनी चाहिए। महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द सरस्वती महाराज का पूरा जीवन सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ राष्ट्र कल्याण के लिए समर्पित रहा। ऐसे महापुरूष समस्त समाज के लिए वंदनीय हैं। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी एवं महंत रघुवीर दास ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में ब्रह्मलीन स्वामी गोपालानन्द महाराज का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। महंत रामानंद सरस्वती महाराज,महंत देवानंद सरस्वती, महंत प्रह्लाद दास व स्वामी चिदविलासानंद ने सभी संत महापुरूषों का शॉल ओढ़ाकर व फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वामी ललितानन्द गिरी,महंत प्रेमदास,संत बलराम दास,साध्वी माता चम्पादेवी,महंत सूरज दास,स्वामी चिदविलासानंद,महंत सूर्यमोहन गिरी, स्वामी राजेन्द्रानन्द सरस्वती,स्वामी कृष्णानन्द,स्वामी शिवानन्द,महंत गोविन्ददास,महंत सत्यव्रतानन्द ,महंत बिहारी शरण,स्वामी नित्यानन्द,स्वामी हरिहरानंद,स्वामी रविदेव शास्त्री,महंत दिनेश दास,पार्षद अनिल मिश्रा,अनिरूद्ध भाटी,राजेंद्र शर्मा,भक्त दुर्गादास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। 


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