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स्वामी श्रद्धानंद के उपवन को सुरक्षित रखना उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी-स्वामी रामदेव

अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद के 96वे बलिदान पर्व पर दी गई भावपूर्ण श्रद्वांजलि


 हरिद्वार। अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद के 96वे बलिदान पर्व पर गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय में वृहद यज्ञ, ध्वजारोहण, गुरुकल परिसर से सिंहद्वार तक शोभायात्रा तथा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। प्रातः कालीन यज्ञ में सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधन स्वामी आर्यवेश, स्वामी आदित्यवेश, डा0 दीनानाथ शर्मा मुख्याध्ष्ठिाता एवं कन्सर्न्ड ऑथोरिटी गुरुकुल कांगडी हरिद्वार,राजस्थान प्रतिनिधि सभा के प्रधान एवं आर्य विद्या सभा के कोषाध्यक्ष विरजानन्द, डा0नवनीत परमार सहायक मुख्याध्ष्ठिाता,डा0 विजेन्द्र शास्त्री मुख्यध्यापक, अश्विनी कुमार आदि ने वैदिक विद्वान् डा0 योगेश शास्त्री के ब्रह्मतत्व में आयोजित बृहद यज्ञ में आहुति प्रदान की। श्रद्वानन्द चौक पर योगगुरु स्वामी रामदेव के उद्बोधन ने सभी को आशान्वित कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि स्वामी दयानन्द नही होते तो आज स्वामी रामदेव भी नही होता। मेरे जीवन का एक-एक निर्माण का पल उन्ही को समर्पित है। हम सभी को मिलकर ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे उनकी छवि गगन में सूर्य चन्द्रमा के समान चमकती रहे। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद के 96वे बलिदान पर्व पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यदि हम स्वामी श्रद्धानंद के उपवन को सुरक्षित रख पाये तो यह उन्हें सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। यज्ञ के पश्चात सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधन स्वामी आर्यवेश एवं उत्तराखण्ड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द ने कुलपताका का आरोहण किया। इस अवसर पर स्वामी यतीश्वरानन्द ने स्वामी श्रद्धानंद की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को संकल्प बनाकर कार्य करने का संकल्प दिलवाया। तदोपरान्त सार्वदेशिक सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद वह दैदीप्यमान नक्षत्र है जिनकी चमक कभी कम नहीं हो सकती। गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय के अधिकारी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर वर्ग तथा जिला आर्य उप प्रतिनिधि सभा हरिद्वार के पदाधिकारियों ने स्वामी आर्यवेश के साथ स्वामी श्रद्धानंद चौक पर अमर हूतात्मा स्वामी श्रद्वान्नद को श्रद्धांजलि समर्पित करते हुए स्वामी आर्यवेश ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद ने अपना सर्वस्व समर्पित करके राष्ट्र को जो दिशा दी है। आज पुनः उस पर चलने की आवश्यकता है। गुरुकुल कांगडी विद्यालय से शोभायात्रा प्रारंभ होकर अमन चौक छोटा परिवार श्रद्धानंदद्वार होती हुयी सिंहद्वार स्थित स्वामी श्रद्धानंद के मूर्ति के समीप पहुचकर श्रद्धांजलि के रुप में परिर्विर्तत हुई। कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए गुरुकुल के ब्रह्मचारियों ने कुलगीत प्रस्तुत किया तथा ब्रह्मचारी अविरल कक्षा 12 की कविता पाठ को सभी ने सराहा। इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी फार्मेसी के निर्माणाध्यक्ष डा0 भीम दत्त सेमवाल ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत अभिनन्दन करते हुए कहा कि हम सभी को स्वामी श्रद्धानंद के मार्ग पर चलना चाहिए यदि हम सबका साथ और सबका विकास की भावना से कार्य करेंगे तो हम अपने पुरातन इतिहास को प्राप्त कर सकते है। श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रुप में अपना वक्तव्य देते हुए स्वामी आर्यवेश ने स्वामी श्रद्धानंद के प्रारम्भिक जीवन से लेकर महात्मा मुंशीराम एवं स्वामी श्रद्धानंद बनने तक की जीवन यात्रा को अत्यन्त रोचक एवं सारगर्भित रुप में वाचित किया। उन्होंने कहा कि जिस लार्ड मैकाले की शिक्षा के विरुद्ध  स्वामी श्रद्धानंद ने गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का बिगुल बजाया था आज उसकी प्रासंगिकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल मेरे जीवन को इस रुप में बदलने का श्रेय अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद के जीवन को जाता है। स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि आज स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन के यथार्थ पक्ष को जानने की आवश्यकता है। उन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान किया था। वे ऐसे मसीहा थे जिनका मूल्यांकन करना सामान्य बात नही है।  आर्य विद्या सभा के कोषाध्यक्ष विरजानन्द ने भी स्वामी श्रद्धानंद के राष्ट्रीय स्वरुप एवं उनके जीवन पर प्रकाश डाला। एडवोकेट रणवीर सिंह ने कहा कि मेरा निर्माण आर्य समाज के द्वारा ही हुआ है। गुरुकुल के सहायक मुख्याध्ष्ठिाता डा0 नवनीत परमार ने स्वामी श्रद्धानंद के ऐतिहासिक पक्ष को बताते हुए कहा कि स्वामी जी के बलिदान का न्यायिक स्तर पर मूल्यांकन जरूरी है। इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी फार्मेसी द्वारा सभी अतिथियों का सम्मानित किया गया। मौके पर सलेस्टर हाउस का विरोध् करने वाले जमीर हसन को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने अन्तिम क्षण तक सरकार के इस फैसले का विरोध् किया और बुचडखाना नही बनने दिया। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व प्रधन हाकम सिंह वर्तमान मंत्री चन्द्रप्रकाश आर्य एवं अर्जुन श्रीधर वानप्रस्थी तथा राजेन्द्र सत्यार्थी आदि को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला आर्य उपप्रतिनिधिसभा हरिद्वार एवं जनपद हरिद्वार के आर्य समाज के अधिकरियों एवं सदस्यों ने बढ-चढकर भाग लिया। इस अवसर पर गुरुकुल के मुख्याध्यापक डा0 विजेन्द्र शास्त्री ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन चरित्र को संक्षेप में बताया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता मुख्याध्ष्ठिाता डा0 दीनानाथ शर्मा ने की। उन्होंने सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया । इस अवसर पर गुरुकुल काँगड़ी विद्यालय के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा गुरुकुल कांगडी फार्मेसी के सभी अध्किारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। ज्वालापुर इण्टर कालेज के छात्रों एवं शिक्षकों ने भी श्रद्धांजलि समर्पित की। सिंहद्वार स्थित मार्केट के लोगो के द्वारा भी श्रद्धांजलि समर्पित की गई। कार्यक्रम का संचालन डा0 योगेश शास्त्री ने किया।


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