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श्री मुनि मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी आनंद राघव ने नियुक्त किए उत्तराधिकारी


हरिद्वार। कनखल स्थित श्री मुनि मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी आनंद राघव महाराज ने महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद आचार्य, साध्वी मंदाकिनी मुनि एवं स्वामी विज्ञानानंद को उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। शनिवार को महामंडलेश्वर स्वामी आनंद राघव के संयोजन एवं सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों तथा षड़दर्शन साधु समाज के सानिध्य में आश्रम में आयोजित पट्टाभिषेक समारोह में संतों ने तिलक चादर प्रदान कर स्वामी शिवानंद आचार्य, साध्वी मंदाकिनी मुनि एवं स्वामी विज्ञानानंद को शुभकामनाएं प्रदान की। मुनि मंडल आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी आनंद राघव महाराज ने कहा कि अपनी अवस्था और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आश्रम का उत्तराधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया है। महामंडलेश्वर स्वामी शिवानंद आचार्य संरक्षक, साध्वी मंदाकिनी कोठरी महंत एवं स्वामी विज्ञानानंद आश्रम के महंत जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों सन्त मुनि मंडल आश्रम के संपूर्ण दायित्व का निर्वहन करेंगे। महंत रघुवीर दास महाराज ने तीनों संतों को शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हुए कहा कि स्वामी आनंद राघव महाराज ने अपने जीवनकाल में उत्तराधिकारी नियुक्त कर सराहनीय कार्य किया है। संत समाज को पूर्ण विश्वास है कि तीनों उत्तराधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए समाज की सेवा परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। महंत शिवानंद महाराज, महंत मोहन सिंह व महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद महाराज ने कहा कि स्वामी आनंद राघव के तीनों उत्तराधिकारी उनके अधूरे कार्यो को आगे बढ़ाएंगे और सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार में योगदान करेंगे। स्वामी विज्ञानानंद, साध्वी मंदाकिनी मुनि व स्वामी शिवानंद आचार्य ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी संत समाज ने उन्हें दी है। उसका गुरू परंपरांओं के अनुरूप पालन करते हुए समाज में धर्म और अध्यात्म का प्रचार करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है। इस अवसर पर स्वामी भगवत स्वरूप,स्वामी प्रबोधानन्द, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी प्रेमानंद, कोठारी महंत राघवेंद्र दास,महंत सूर्यांश मुनि, महन्त जयेन्द्र मुनि,स्वामी डा.गंगादास उदासीन,स्वामी ललितानंद,स्वामी दयामूर्त्यानन्द,महंत गंगादास,महंत बिहारी शरण,महंत अंकित शरण,महंत जयराम दास,महंत रघुवीर दास, महन्त दयानंद,स्वामी कैलाश मुनि,महन्त मोहन सिंह, महन्त देवेन्द्र दास सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे। 

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