ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में हरतालिका तीज के अवसर पर गंगा तट पर विशेष प्रार्थना, संकीर्तन एवं आरती का आयोजन किया गया। हरतालिका तीज केवल एक पर्व या परंपरा नहीं है,बल्कि यह नारी शक्ति की त्यागमयी शक्ति,अटूट संकल्प और समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है । स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि नारी शक्ति समाज और संस्कृति की आधारशिला है। नारी का स्वरूप केवल परिवार तक सीमित नहीं है,बल्कि वह पूरे समाज और संस्कृति की दिशा निर्धारित करता है।सनातन परंपरा में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों ने ज्ञान, तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति से यह सिद्ध किया कि नारी केवल गृहिणी नहीं,बल्कि संस्कृति की वाहक और ज्ञान की धारा है।आवश्यकता है कि हम इन आदर्शों को स्मरण करते हुए आधुनिक समाज में नारी को समान अवसर दें।शिक्षा,सम्मान और नेतृत्व के क्षेत्र में नारी का सशक्तिकरण ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र और मानवता का सशक्तिकरण है। नारी का त्याग,तप और करुणा ही परिवार और राष्ट्र की स्थिरता का आधार है। हरतालिका तीज हमें यह प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति में आस्था रखें,अपने जीवन में संयम और साधना का समावेश करें तथा पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक सौहार्द को प्राथमिकता दें। जब नारी सशक्त और संतुलित होती है तो पूरा समाज समृद्ध और उन्नत होता है।परमार्थ निकेतन परिवार ने सिख परंपरा के चतुर्थ गुरु,श्रीगुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर गंगाजी की आरती के माध्यम से विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।गुरु साहिब की वाणी और सेवाभाव को याद करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि गुरु रामदास जी का जीवन त्याग,सेवा और करुणा का प्रतीक है।उन्होंने न केवल अध्यात्म का प्रकाश फैलाया,बल्कि समाज को सच्चाई,समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।स्वामी जी ने कहा,गुरु रामदास जी का दर्शन है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिये बल्कि सेवा और समर्पण में ही उसका वास्तविक स्वरूप प्रकट होना चाहिये है।उनकी अमर वाणी आज भी मानव समाज को एकजुट होकर सत्य,न्याय और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करती है।
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में हरतालिका तीज के अवसर पर गंगा तट पर विशेष प्रार्थना, संकीर्तन एवं आरती का आयोजन किया गया। हरतालिका तीज केवल एक पर्व या परंपरा नहीं है,बल्कि यह नारी शक्ति की त्यागमयी शक्ति,अटूट संकल्प और समर्पण का अद्वितीय प्रतीक है । स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि नारी शक्ति समाज और संस्कृति की आधारशिला है। नारी का स्वरूप केवल परिवार तक सीमित नहीं है,बल्कि वह पूरे समाज और संस्कृति की दिशा निर्धारित करता है।सनातन परंपरा में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी नारियों ने ज्ञान, तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति से यह सिद्ध किया कि नारी केवल गृहिणी नहीं,बल्कि संस्कृति की वाहक और ज्ञान की धारा है।आवश्यकता है कि हम इन आदर्शों को स्मरण करते हुए आधुनिक समाज में नारी को समान अवसर दें।शिक्षा,सम्मान और नेतृत्व के क्षेत्र में नारी का सशक्तिकरण ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र और मानवता का सशक्तिकरण है। नारी का त्याग,तप और करुणा ही परिवार और राष्ट्र की स्थिरता का आधार है। हरतालिका तीज हमें यह प्रेरणा देती है कि हम प्रकृति में आस्था रखें,अपने जीवन में संयम और साधना का समावेश करें तथा पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक सौहार्द को प्राथमिकता दें। जब नारी सशक्त और संतुलित होती है तो पूरा समाज समृद्ध और उन्नत होता है।परमार्थ निकेतन परिवार ने सिख परंपरा के चतुर्थ गुरु,श्रीगुरु रामदास जी महाराज के ज्योति ज्योत दिवस पर गंगाजी की आरती के माध्यम से विशेष श्रद्धांजलि अर्पित की।गुरु साहिब की वाणी और सेवाभाव को याद करते हुए स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि गुरु रामदास जी का जीवन त्याग,सेवा और करुणा का प्रतीक है।उन्होंने न केवल अध्यात्म का प्रकाश फैलाया,बल्कि समाज को सच्चाई,समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।स्वामी जी ने कहा,गुरु रामदास जी का दर्शन है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिये बल्कि सेवा और समर्पण में ही उसका वास्तविक स्वरूप प्रकट होना चाहिये है।उनकी अमर वाणी आज भी मानव समाज को एकजुट होकर सत्य,न्याय और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करती है।
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