हरिद्वार। डॉ.आर.एस.टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासनिक अकादमी नैनीताल के तत्वावधान में अकादमी के महानिदेशक बीपी पाण्डे के निर्देशन,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मुख्य संयोजन मे जनपद में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील विकासखण्ड लक्सर के अधिकारियों, र्मचारियों एवं आपदा में मुख्य रूप से अग्रणीय भूमिका का निर्वहन करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों को‘ आपदा जोखिम प्रबंधन’’विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर प्रशिक्षण प्रारम्भ हुआ। कार्यशाला के कार्यक्रम निदेशक एवं अकादमी के आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ.ओमप्रकाश ने उत्तराखण्ड में आने वाली आपदों के प्रति प्रतिभागियों को अवगत कराते हुए जागरूक किया कि आपदाओं के आने से पूर्व आपदाओं के आने के उपरान्त तथा आपदाओं के आने के बाद क्या करना चाहिये,किस प्रकार आर्थिक हानि,जनहानि एवं पशु हानि को कम किया जा सकता है। किस प्रकार स्थानीय जन समाज का सहयोग लिया जाये और क्या-क्या भूमिका आपदा सहयोगी विभागों की होनी चाहिये तथा आपदाओं में सभी सक्रिय सहभागिता पर विस्तृत जानकारियां दी गयी।डॉ.नरेश चौधरी ने कहा कि उत्तराखण्ड दैवीय आपदाओं एवं मानव जनित आपदाओं के मध्यनजर,भौगोलिक स्थितियों के अनुसार संवेदनशील राज्यों में आता है। यहां के जनमानस को जागरूक रहना अनिवार्य है। आपदाओं को रोका नहीं जा सकता परन्तु जागरूकता से न्यून किया जा सकता है।डॉ.नरेश चौधरी ने अपने अनुभवों को प्रतिभागियों से साझा किया। कार्यशाला में ग्राम विकास अधिकारी,पुलिस विभाग,राजस्व विभाग,होमगार्ड, पीआरडी ,महिला मंगल दल,युवा मंगल दल,आशा कार्यकत्री,दिव्यांग प्रतिनिधि एवं सामाजिक स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। अन्त में प्रो.ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय एवं रेडक्रास चेयरमैन उत्तराखण्ड डॉ.नरेश चौधरी को सम्मानित भी किया गया।
हरिद्वार। डॉ.आर.एस.टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासनिक अकादमी नैनीताल के तत्वावधान में अकादमी के महानिदेशक बीपी पाण्डे के निर्देशन,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के मुख्य संयोजन मे जनपद में आपदा की दृष्टि से संवेदनशील विकासखण्ड लक्सर के अधिकारियों, र्मचारियों एवं आपदा में मुख्य रूप से अग्रणीय भूमिका का निर्वहन करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों को‘ आपदा जोखिम प्रबंधन’’विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर प्रशिक्षण प्रारम्भ हुआ। कार्यशाला के कार्यक्रम निदेशक एवं अकादमी के आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ.ओमप्रकाश ने उत्तराखण्ड में आने वाली आपदों के प्रति प्रतिभागियों को अवगत कराते हुए जागरूक किया कि आपदाओं के आने से पूर्व आपदाओं के आने के उपरान्त तथा आपदाओं के आने के बाद क्या करना चाहिये,किस प्रकार आर्थिक हानि,जनहानि एवं पशु हानि को कम किया जा सकता है। किस प्रकार स्थानीय जन समाज का सहयोग लिया जाये और क्या-क्या भूमिका आपदा सहयोगी विभागों की होनी चाहिये तथा आपदाओं में सभी सक्रिय सहभागिता पर विस्तृत जानकारियां दी गयी।डॉ.नरेश चौधरी ने कहा कि उत्तराखण्ड दैवीय आपदाओं एवं मानव जनित आपदाओं के मध्यनजर,भौगोलिक स्थितियों के अनुसार संवेदनशील राज्यों में आता है। यहां के जनमानस को जागरूक रहना अनिवार्य है। आपदाओं को रोका नहीं जा सकता परन्तु जागरूकता से न्यून किया जा सकता है।डॉ.नरेश चौधरी ने अपने अनुभवों को प्रतिभागियों से साझा किया। कार्यशाला में ग्राम विकास अधिकारी,पुलिस विभाग,राजस्व विभाग,होमगार्ड, पीआरडी ,महिला मंगल दल,युवा मंगल दल,आशा कार्यकत्री,दिव्यांग प्रतिनिधि एवं सामाजिक स्वयंसेवी संस्थाओं के स्वयंसेवकों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। अन्त में प्रो.ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय एवं रेडक्रास चेयरमैन उत्तराखण्ड डॉ.नरेश चौधरी को सम्मानित भी किया गया।
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